प्रयागराज से जल भरकर काशी के लिए रवाना होते कांवड़िये।
- फोटो : अमर उजाला।
प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से कांवड़ में गंगा जल भरकर शिवभक्त काशी के लिए रवाना हो जाते हैं। इस समय कांवड़ियों की भीड़ पूरे चरम पर है। पूरे श्रावण मास में किसी भी दिन जल चढ़ाने से बाबा का आशीष मिलता है लेकिन बड़ी संख्या में कांवड़िये सावन के सोमवार या फिर शिवरात्रि को ही जल चढ़ाने का प्रयास करते हैं। करीब 130 किलोमीटर की यात्रा कर वह बाबा विश्वनाथ के शिव लिंग पर जलाभिषेक करेंगे।
दशाश्वमेध घाट से जल लेकर शिवभक्त शास्त्री पुल, झूंसी, अंदावा, हनुमानगंज, सैदाबाद, हंडिया, बरौत, गोपीगंज, औराई, कछवा, राजा तालाब, रोहनिया, लहरतारा होते हुए काशी विश्वनाथ पहुंचते हैं। इस मार्ग पर कांवड़ियों के उत्तरी लेन पर तमाम शिवभक्तों की ओर से चाय, नाश्ता, भोजन और भंडारे की व्यवस्था की जाती है। तमाम मंदिरों और धर्मशालाओं के अलावा अस्थायी बसेरा बनाकर कांवड़ियों का स्वागत करने की व्यवस्था रहती है। डीजे पर भगवान शिव के भक्तिमय गीतों की धून पर नाचते गाते हुए कांवड़िये चल रहे हैं। तमाम झाकियां और चौकियां सजाई गई हैं। मंदिर नुमा झाकियों को झालरों और फूलों से सजाया गया है।