पेशवाई
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अखाड़े के ‘हाईकोर्ट’ के कोतवाल गिरधर दास कहते हैं, यहां का नाश्ता और खाना सात्विक तो है, लेकिन विविधता दिखती है। अखाड़े के ज्यादातर श्रद्धालु पंजाब और राजस्थान से भी जुड़े हैं, सो बाटी-चूरमा, मक्के की रोटी-सरसों का साग, छोले कुलचे, दाल-बाटी सहित तरह-तरह के व्यंजन बनते हैं। इसके अतिरिक्त राजमा, कढ़ी, पकौड़ी, टिक्की, समोसा, रसगुल्ला के अतिरिक्त ‘कड़ा प्रसाद’ में हलुआ भी बनता है। कभी-कभी तो कई तरह की डिशेज एक साथ बन जाती हैं। व्यंजन स्वादिष्ट हो, इसीलिए व्यंजनों में घी और मेवे डालने में कोताही नहीं होती। इसमें अखाड़े से जुड़े श्रद्धालु भी सहभागी है, इसीलिए कभी-कभी तो चिप्स और कुरकुरे भी बांटे जाते हैं।