हाथ में हुनर काम करने की कारीगरी इंशान को कहा नहीं पहुंचा सकता है। कुछ ऐसा ही कलाकृतियां प्रयाग के कुंभ को सुशोभित करने के साथ कुंभ में आए लोगों को बरबस रोमांचित कर रही हैं। सेक्टर एक में एक जनपद एक उत्पाद लगे हस्तशिल्प और काष्ठ शिल्प की प्रदर्शनी इसका साक्षी बना। जहां पर कारीगरों के हांथों के बने केले की रेशे से चटाई, प्लेट, जूते, पीतल के बने आकर्षक गणेश की मूर्ति और मिट्टी के बने बर्तन बेहद मनोहारी दिखीं। जिसकी खरीददारी बड़े रुचि के साथ की।
एक जनपद और एक उत्पाद के तहत उपेक्षित हस्तशिल्प में माहिर कारीगरों के उत्थान के लिए राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर इन्हें भागीरथ प्रयास किया गया। इसके लिए जहां उनकी आर्थिक खस्तेहाली को दूर कर धन प्रदान करना है तो वहीं बिना प्रचार प्रसार के दम तोड़ती हस्तकला को जीवंत बनाने के लिए कुंभ मेला को साधने का काम किया। इसी मंशा से जिला उद्योग केन्द्र ने मेला के सेक्टर एक के करीब 4600 वर्ग मीटर भूमि पर हस्त शिल्प उत्पाद प्रदर्शनी लगाई। जिसकी शुरुआत बीते बुधवार को हुई।
यहां हस्त शिल्प कारीगरों की सौ दुकानें लगाई गई हैं। जिसमें अमेठी की मंूज पात की कुर्सियां, अम्बेडकर नगर की वस्त्र उत्पाद, अलीगढ़ की ताले व हार्डवेयर के सामान, आजमगढ़ की मिट्टी के बने बर्तनों की कलाकृतियां, कुशीनगर और कौशाम्बी से केले से बने उत्पादों जैसे चटाइयां, तौलियां की आकर्षक दुकाने सजी रहीं। जिसे देखने और खरीदने के लिए संगम स्नान करने वाले श्रद्धालु आते हैं। इसे बड़े ही रोचकता के साथ खरीदते हैं। उद्यान विभाग के संयुक्त आयुक्त उद्योग सुंधाशु तिवारी ने बताया कि प्रदेश के उपेक्षित हस्तशिल्पियों के उत्पादों को मंच पर लाने की पहल है। ताकि इनके उत्पादों का प्रचार प्रसार हो सके और इनमें स्किल डेवलपमेंट हो, एक अच्छा बाजार मिले। ताकि इनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो।