छावनी में महिला श्रीमहंतों, साध्वियों ने भी डेरा डाला
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जूना अखाड़े की पेशवाई के साथ ही छावनी में महिला श्रीमहंतों, साध्वियों ने भी डेरा डाला। अखाडे़े की श्रीमहंत मीरापुरी, अंतर्राष्ट्रीय श्रीमहंत आराधना गिरि, अंबाला से श्रीमहंत राधागिरि, सिरसा, हरियाणा की साध्वी वृत्तिकानंद गिरि, वृंदावन की साध्वी ऋषिका आदि ने कहा अब कुंभ पर्व के दौरान अनेक अनुष्ठान होंगे।
जगह-जगह अखाड़े के संतों का किया गया भव्य स्वागत
पेशवाई के दौरान अखाड़े के संतों, श्रीमहंतों का जगह-जगह स्वागत किया गया। कुंभ मेला कार्यालय के सामने कुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद, डीआईजी कुंभ मेला कवीन्द्र प्रताप सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक प्रोटोकॉल पूर्णेंदु सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने माल्यार्पण करके सतों का स्वागत किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास, निर्मोही अनी के श्रीमहंत राजेंद्र दास, दिगंबर अनी की श्रीमहंत कृष्णदास नगरिया, निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रवींद्र पुरी, श्रीमहंत आशीष गिरि आदि ने भी संतों को माल्यार्पण किया।
इसी क्रम में प्रयाग पीठाधीश्वर स्वामी माधवानन्द, नैमिष पीठाधीश्वर लक्ष्येश्वर आश्रम, महंत मोहन गिरि, महंत बलदेव गिरि, महंत शंकर पुरी, महंत मनोज भारती, महंत वासुदेवानन्द सरस्वती, महंत संतरानन्द सरस्वती, थानापति आत्मानन्द,प्रभाशंकर अमित शास्त्री, ओम प्रकाशानंद, भरत जी शर्मा अतुलानंद, नेहा भारती, संगीता शर्मा, प्रकाशानंद, नागेंद्रानंद, शारदानंद आदि ने भी पेशवाई के दौरान राजेराजेश्वरी पीठ के सामने माल्यार्पण करके संतों का स्वागत किया।
जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि
जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने निर्विघ्न कुंभ की कामना की है। कहा, जिस तरह वृक्ष फल, फूल, छाया, गंध-सुगंध आदि सभी के लिए है, उसी तरह से संन्यासी सभी के लिए होता है। संन्यास का अर्थ परमार्थ है। हम लोककल्याण की भावना और सहअस्तित्व के सूत्रवाक्य के साथ यहां आए हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा, पेशवाई का अर्थ है समष्टि के कल्याण के लिए यतियों का एकजुट होना। कुंभ की संस्कृति एकात्मता का संदेश देती है। यहां गंगा के तट पर हम एकहैं। यहां सन्यासी एकसाथ पहुंचे हैं। हमारी संस्कृति विश्व बंधुत्व का भाव देती है। सभी उपासक यहां आए हैं।