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श्रद्धालु जल्द कर सकेंगे अक्षयवट के दर्शन, संपूर्णानंद बोले- सनातनधर्मियों के लिए कुंभ का बड़ा उपहार

Wed, 26 Dec 2018 01:39 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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प्रयाग कुंभ - फोटो : अमर उजाला
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मूल अक्षयवट में प्रवेश के लिए मंगलवार को डेढ़ मीटर चौड़ा रास्ता फाइनल कर लिया गया। निकास मार्ग की चौड़ाई इससे अधिक होगी। प्राचीन किले की दीवार से कुछ दूरी बनाते हुए प्रवेश और निकास का रास्ता दिया जा रहा है। एमएनआईटी की तकनीकी रिपोर्ट के अध्ययन के आधार पर सेना की सहमति से पुलिस ने बैरीकेडिंग का निर्धारण किया है। सब कुछ ठीक रहा तो पांच जनवरी से देश-दुनिया के श्रद्धालु मूल अक्षयवट के दर्शन कर सकेंगे।

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अकबर के किले में मूल अक्षयवट के दर्शन की अब तक की प्रस्तावित रूपरेखा की मंगलवार को सेना के अफसरों ने समीक्षा की। इसके साथ ही सेना ने मूल अक्षयवट का सुरक्षा घेरा बनाने, बैरीकेडिंग को मूर्त रूप देने के साथ ही अन्य इंतजामों पर काम तेज कर दिया है। जल्द ही किले द्वार के पास बन रहे प्रवेश मार्ग को दुरुस्त कर लिया जाएगा। डीआईजी कुंभ कवींद्र प्रताप सिंह ने मूल अक्षयवट की बैरीकेडिंग के अलावा प्रवेश और निकास मार्ग का निरीक्षण कर तैयारियों को परखा। उन्होंने बताया कि एमएनआईटी की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर सेना ने दर्शन की रूपरेखा बनाई है। प्रवेश के लिए डेढ़ मीटर चौड़ा रास्ता तय किया गया है। इस पर एक साथ सिर्फ दो कतारें लगेंगी। महिलाओं-पुरुषों को अलग-अलग कतार में प्रवेश दिया जाएगा। भीतर के रास्ते की फिनिशिंग और अन्य तैयारियां पूरी करा ली गईं तो सेना की सहमति से पांच जनवरी से अक्षय वट दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। इससे पहले 10 जनवरी से मूल अक्षयवट के दर्शन शुरू कराने की बात कही गई थी।

सरस्वती प्रतिमा के लिए परिक्रमा पथ, अफसरों ने किया निरीक्षण  
अपर मेलाधिकारी दिलीप कुमार त्रिगुणायक ने सरस्वती कूप पर प्रतिमा स्थापना की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि प्रतिमा तैयार कराई जा रही है। ढाई फीट ऊंचे फाउंडेशन पर इस प्रतिमा को स्थापित किया जाएगा। यहां परिक्रमा पथ भी बनाया जा रहा है। श्रद्धालु मां सरस्वती की परिक्रमा भी कर सकेंगे। कोशिश की जा रही है कि 31 दिसंबर तक प्रतिमा स्थापित करा ली जाए, ताकि श्रद्धालु मूल अक्षयवट के साथ ही सरस्वती कूप के भी दर्शन कर सकें।

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मूल अक्षयवट सनातनधर्मियों के लिए कुंभ का सबसे बड़ा उपहार: संपूर्णानंद ब्रह्मचारी 

- फोटो : अमर उजाला
जूना अखाड़े की पेशवाई में चंडीगढ़ से पहुंचे शंभू पंच अग्नि अखाड़े के सचिव श्री महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी ने मंगलवार को संगम तट पर गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती की पावन त्रिवेणी की सविधि पूजा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबे समय बाद प्रयागराज में बंद मूल अक्षयवट को खोलवा कर कुंभ में सनातन धर्मियों को पुण्य लाभ का अनूठा उपहार दिया है। इसे देश-दुनिया के सनातनधर्मी हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि मूल अक्षयवट खोले जाने से इस कुंभ की महिमा हर सनातनधर्मी के लिए बढ़ गई है। 

शंभू पंच अग्नि अखाड़े के सचिव संपूर्णानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि लंबे समय से किले में बंद मूल अक्षयवट को खोलने की संत मांग उठाते रहे हैं। इस कुंभ में भी अखाड़ा परिषद ने सरकार के सामने किले में बंद हिंदू संस्कृति के प्रतीक देवी-देवताओं को आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने की पुरजोर वकालत की थी। उन्होंने कहा कि पीएम ने मुगलकाल से किले में बंद मूल अक्षयवट को खोलवा कर हिंदू संस्कृति का गौरव विश्व भर में स्थापित कर दिया है। मूल अक्षयवट की जड़ें ज्ञान से जुड़ी हैं। इनके दर्शन से मानव जाति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। 
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मूल अक्षयवट के दर्शन के दौरान कैमरा समेत कई वस्तुएं प्रतिबंधित 

अकबर के किले में मूल अक्षयवट के दर्शन के पलों को श्रद्धालु चाहकर भी कैद नहीं कर सकेंगे। वहां तस्वीरें नहीं उतारी जा सकेंगी। फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी पूर्णतया प्रतिबंधित की जा रही है। मूल अक्षयवट में कैमरा, पेन ड्राइव के साथ प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मोबाइल किसी के पास होगा तो स्विच्ड ऑफ रखना होगा। इसके अलावा कई वस्तुएं श्रद्धालु अपने साथ नहीं रख सकेंगे। सुरक्षा और सहूलियत दोनों को ध्यान में रखते उच्चस्तरीय सुरक्षा खाका खींचते हुए पुलिस ने दर्शन की यह रणनीति तैयार की है। 

सेना की चौकसी और पुलिस के कड़े पहरे में मूल अक्षयवट के दर्शन के दौरान कई चीजें प्रतिबंधित रहेंगी। करीब 435 साल बाद खुलने जा रहे मूल अक्षयवट की सुरक्षा को लेकर प्रशासन खासा संजीदा है। मेला प्रशासन के साथ पुलिस ने सहज दर्शन की रूपरेखा बनाते हुए कई प्रतिबंधों को भी शामिल किया है। खासतौर से कैमरा प्रतिबंधित रहेगा। मूल अक्षयवट की न तो तस्वीरें उतारी जा सकेंगी और ना ही वीडियोग्राफी ही होगी। प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची तैयार की जा रही है। मूल अक्षयवट के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु झोला, बैग, अटैची या इस तरह का कोई भी सामान लेकर भीतर प्रवेश नहीं करेंगे। किले के मुख्य प्रवेश द्वार पर बन रहे सुरक्षा प्वाइंट पर तलाशी के दौरान किसी के पास ऐसी वस्तुएं होंगी तो रखवा ली जाएंगी। श्रद्धालु खाली हाथ कतार में लगकर प्रवेश करेंगे और बैरीकेडिंग से होकर बिना रुके चलते-फिरते दर्शन कर बाहर निकल जाएंगे। सुरक्षा का खाका खींचने वाले पुलिस के एक बड़े अफसर ने बताया कि पूरी कोशिश की जा रही है कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को अक्षयवट का सहज दर्शन मिल सके , लेकिन सुरक्षा मानकों की किसी भी दशा में अनदेखी नहीं की जाएगी। 

पातालपुरी में दिखने लगा प्रतिबंधों का असर
प्रयागराज। मूल अक्षयवट में सुरक्षा मानकों को लेकर लगने वाले प्रतिबंधों का असर अभी से दिखने लगा है। पातालपुरी में फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी नहीं करने दी जा रही है। मंगलवार को इलेक्ट्रानिक चैनल की टीम को कैमरा के साथ पातालपुरी में सुरक्षाकर्मियों ने प्रवेश नहीं करने दिया। पातालपुरी परिसर में मोबाइल से भी तस्वीरें खींचने पर मना किया जा रहा है। परिसर में स्थित प्रतिमाओं पर भी कैमरा क्लिक करने से रोक दिया जा रहा है। 
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