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कुंभ 2019 का है अद्भुत नजारा, विदेशी संतों की थाली में परोसा जा रहा दाल-बाटी, चोखा

Sat, 19 Jan 2019 01:24 PM IST
shubham डॉ. अखिलेश मिश्र, अमर उजाला, प्रयागराज
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kumbh - फोटो : अमर उजाला
कुंभ की विविधता सिर्फ पंडालों या शिविरों तक सीमित नहीं, बल्कि संतों की रसोई में भी इसे चखा जा सकता है। खासकर विदेशी संतों के यहां तो बिना भारतीय मसालों से छौंका लगाए कुछ बनता ही नहीं। दाल, बाटी, चोखा, मटर-शाही पनीर की तो डिमांड रोज ही रहती है। संगम की रेती पर विदेशी संत और उनके यूरोपीय भक्तगणों का व्यंजन इन दिनों काली मिर्च, जीरा, हल्दी, इलायची, सरसों, मगरैल, अदरक के बिना अधूरा है। इसके अलावा संतों की रसोई का जायका बढ़ाने के लिए राजस्थान एवं गुजरात के खानसामे भी आए हैं।
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कुंभ मेला में पायलट बाबा के शिविर में इन दिनों विदेशी भक्तों को बाकायदा जमीन पर बैठकर भारतीय प्रसाद ग्रहण करते देखा जा सकता है। वे सभी लंगर की व्यवस्था से अभिभूत हैं। शिविर की रामेश्वरी का कहना है कि वह और उनके साथी भारतीय व्यंजन के मुरीद हैं। वह इससे पहले भी हरिद्वार, उज्जैन और नासिक के कुंभ में स्वामी जी के साथ भारतीय व्यंजन का लुत्फ ले चुकी हैं। 
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वहीं संत बालक योगेश्वर दास के शिविर में चल रहे भंडारे में यूरोप की वेलेंटाइना, ऐश्वर्य, रामेश्वरी, गैब्रियला एवं मोहनमाखन भारतीय व्यंजन छोले, दाल-चावल एवं रोटी बड़े चाव से खा रही थीं, जब उनसे भारतीय व्यंजन के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि भारतीय मसालों का कोई जवाब नहीं है। प्रयागराज में इस समय अधिकांश विदेशी संत मेथी की भजिया, पंजाबी सब्जी और आटे, बेसन, मूंग का हलवा का स्वाद लेना नहीं भूलते हैं। 

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जमीन पर बैठ करते भोजन
पायलट बाबा के शिविर में आस्ट्रिया, क्रोएशिया, कोलंबिया सहित कई देशों से सैकड़ों की संख्या में भक्त और विदेशी संत पहुंचे हैं। स्वामी जी से योग और अध्यात्म का ज्ञान लेने वाले यह विदेशी भक्त डाइनिंग टेबल पर नहीं, बल्कि जमीन पर पालथी मारकर भोजन करते हैं।
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हरी सब्जी और फूल गोभी पसंदीदा 
विदेशी भक्तों के बीच सबसे अधिक डिमांड हरी सब्जी, पत्ता गोभी, फूल गोभी और शिमला मिर्च की है। गाजर की सलाद के तो सभी दीवाने हैं। रसोई में उबली सब्जी की भी मांग है।
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