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इसे अंतिम मानव तक पहुंचने की यात्रा भी कहते हैं। मातृ शक्ति को धर्म और स्वर्गम भी कहा गया है। वह घर को स्वर्ग बनाने वाली है। मातृ शक्ति को पितरों का उद्धार करने वाली देवी भी माना जाता है। इस मौके पर संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से कथा के संयोजक मदन पालीवाल, मंत्रराज पालीवाल, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
विदाई बेला में बापू की भी आंखोें से छलते प्रेम के आंसू
राम कथा के विराम की घोषणा पर हजारों श्रद्धालु भावुक हो उठे। प्रेम के आंसू छलके तो मोरारी बापू की भी आंखें नम हो गईं। श्रद्धालुओं ने जय सियाराम के जयकारे लगाए और भावभीनी भीगी आंखों से सब ने एक -दूसरे को गले लग कर विदाई दी।