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Diwali 2020 : दिवाली पर आज सुख, समृद्धि और सौभाग्य का संगम, जानें दिवाली पर पूजन का शुभ मुहुर्त

Sat, 14 Nov 2020 01:06 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • आयुष्मान योग में सुबह 7:30 बजे तक करें पूजा
  • सौभाग्य योग 7:31 बजे आरंभ होने पर दीपोत्सव की पूजा
  • स्वाति नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि योग में रात 8:09 बजे तक लक्ष्मी पूजा का विशेष मुहूर्त है। इसमें प्रदोष काल में शाम 5:13 बजे 7:11 बजे तक स्थिर बृष लग्न में लक्ष्मी पूजा का महायोग।
  • महापूजा, काली पूजा, तांत्रिक एवं मंत्र सिद्धियां स्थिर सिंह लग्न में रात 11: 49 बजे से 2:04 बजे तक। इसी लग्न में लक्ष्मी के साथ इंद्र , कुबेर की भी पूजा की जाएगी और कमला महाविद्या की सिद्धि भी इसी लग्न में होगी।
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prayagraj news दिवाली की पूर्व संध्या पर बाजारों में उमड़ी भारी भीड़। - फोटो : prayagraj
इस बार दिवाली पर शनिवार को ग्रहों की अनुकूल दशा कोविड-19 के बावजूद सुख,समृद्धि और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। स्वग्रही शनि आर्थिक समृद्धि दिलाने वाले ग्रह गुरु के साथ अपनी कक्षा में रहेगा। ऐसे में इस बार की दिवाली कार्य सिद्धि के लिए प्रबल योग लेकर आएगी। ज्योति पर्व पर महालक्ष्मी, गणेश की पूजा के साथ ही शहर का हर कोना ज्योर्तिमय हो जाएगा। इससे पहले रंग-बिरंगी झालरों से सिवलिप लाइंस से लेकर पुराने शहर की सड़कों, गलियों तक को सजा दिया गया है।
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prayagraj news : छोटी दिवाली को बाजार में उमड़ी भारी भीड़। - फोटो : prayagraj
शनिवार को अमवस्या दोपहर 2:20 बजे लगेगी। लेकिन इससे पहले ही शुभ मुहूर्त मिलने से दीपोत्सव की पूजा आरंभ हो जाएगी। दिवाली पर एक साथ कई दुर्लभ संयोग बनेंगे। नवरात्रि में पाई जाने वाली कालरात्रि भी इस बार की महारात्रि के साथ मिल रही है। ऐसा इस बार अमावस्या के साथ नरक चतुर्दशी की संधि की वजह से होगा।

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prayagraj news : पटाखों की खरीदारी करते लोग। - फोटो : prayagraj
स्वग्रही गुरु और शनि यश, कीर्ति और समृद्धि प्रदान करेंगे। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक दिवाली अपमृत्यु, अकाल मृत्यु से मुक्ति, रोग एवं ब्याधियों के नाश के साथ ही रूप, यौवन और लक्ष्मी प्राप्ति का दीप पर्व है। ऐसे में इस बार ग्रहों की अनुकूल दशा इस ज्योति पर्व में चार चांद लगाएगी। इस दिवाली पर लक्ष्मी, गणेश के साथ समुद्र मंथन से प्राप्त आयोग्य के देवता धनवंतरि, इंद्र, चित्रगुप्त और यम की भी पूजा की जाएगी।

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prayagraj news : पटाखों की खरीदारी करते लोग। - फोटो : prayagraj
इस दौरान रंगोली से सजी वेदियों पर कलश और दीप जलाकर श्रीसूक्त, महालक्ष्मी स्तोत्र, कनकधारण स्तोत्र तथा गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ लाभकारी होगा। रात्रि जागरण कर काली पूजन पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र को बल प्रदान करेगा। ऐसा कई ग्रहों के स्वग्रही और योगकारी स्थितियों में विराजमान होने से होगा। 
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prayagraj news : दिवाली पर खरीदारी करते लोग। - फोटो : prayagraj

आर्थिक क्षेत्र में मजबूती लाएंगे गुरु और शनि

ज्योतिष के मुताबिक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले ग्रह गुरु और शनि हैं। ऐसे में इस वर्ष दीपावली पर धन संबंधी कार्यों की शुरुआत लाभाकरी होगी। अमावस्या तिथि में गुरु अपनी राशि धनु में और शनि अपनी राशि मकर में रहेंगे। वहीं, शुक्र कन्या राशि में नीच का रहेगा। इन तीनों ग्रहों का यह दुर्लभ योग 499 वर्ष बाद आया है। इससे पहले वर्ष 1521 में नौ नवंबर को ग्रहों की यही स्थिति बनी थी। इस बार शनिवार को लाभ मुहूर्त दोपहर 13:47 बजे से 15:12 तक है। इसके बाद अमृत योग 15:12 बजे से 16:36 बजे तक मिलेगा।
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prayagraj news : दिवाली पर खरीददारी करते लोग। - फोटो : prayagraj

दूसरे दिन भी धनतेरस पर लक्ष्मी मेहरबान

त्रयोदशी शुक्रवार को दिन भर रहने से इस दिन  महालक्ष्मी की आराधना की गई। लोगों ने घरों में पंचदीप जलाए। शाम को प्रदोषकाल में महालक्ष्मी की सविधि पूजा कर सुख, समृद्धि की कामना की गई।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
  • आयुष्मान योग में सुबह 7:30 बजे तक करें पूजा
  • सौभाग्य योग 7:31 बजे आरंभ होने पर दीपोत्सव की पूजा
  • स्वाति नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि योग में रात 8:09 बजे तक लक्ष्मी पूजा का विशेष मुहूर्त है। इसमें प्रदोष काल में शाम 5:13 बजे 7:11 बजे तक स्थिर बृष लग्न में लक्ष्मी पूजा का महायोग।
  • महापूजा, काली पूजा, तांत्रिक एवं मंत्र सिद्धियां स्थिर सिंह लग्न में रात 11: 49 बजे से 2:04 बजे तक। इसी लग्न में लक्ष्मी के साथ इंद्र , कुबेर की भी पूजा की जाएगी और कमला महाविद्या की सिद्धि भी इसी लग्न में होगी।
 

जयंती पर धनवंतरि की उतारी आरती

शुक्रवार को धन तेरस पर आरोग्य के देवता धनवंतरि की सविधि पूजा की गई। भगवान धनवंतरि की झांकियां सजाई गईं। वैद्यों ने तरह-तरह की जड़ी-बूटियों से दरबार सजाए और औषधियां तैयार कीं। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्नों में एक भगवान धनवंतरि भी अमृत कलश के साथ निकले थे।
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