गोपीगंज से आए शिवमोहन ङ्क्षसह बताते हैं, जनेऊ पहनना जितना आवश्यक है, उसके अनुसार जीवनचर्या जीना कहीं आवश्यक है। पूजन में, नित्य क्रिया में जनेऊ का विशेष महत्व है, जिसका वह पालन करते हैं। रायबरेली से आए मोहन गुप्ता बताते हैं कि जब वह 16 वर्ष के थे तभी उनका जनेऊ संस्कार करा दिया गया था। उनके घर का माहौल धार्मिक होने की वजह से जनेऊ उनके जीवन में रच बस गया है।