बृहस्पतिवार को प्रयागराज में भी वर्ष के आखिरी सूर्य ग्रहण का प्रभाव रहा। ज्योतिर्विदों के मुताबिक प्रयागराज में इसकी अवधि सुबह 8.19 से लेकर 11.10 बजे रही जबकि सूतक बारह घंटे पहले ही आरंभ हो गया था। त्रिवेणी बांध स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर सहित शहर के तमाम मंदिरों में भोर से ही कपाट बंद कर दिए गए थे जो ग्रहण के बाद ही खुले। ग्रहण के बाद महंत नरेंद्र गिरि की देखरेख में लेटे हुए हनुमान का पंचामृत से स्नान कराया गया। फिर विभिन्न प्रकार के फूलों से उनका मनोहारी शृंगार किया गया। भव्य आरती के बाद दर्शन, पूजन के लिए मंदिरों के कपाट खोल दिए गए।
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- फोटो : प्रयागराज
मान्यता के अनुसार लोगों ने ग्रहण की अवधि में अन्न जल तक नहीं ग्रहण किया। खाने पीने की चीजों में तुलसी का दल डाला गया था। लोगों ने ग्रहण काल से आरंभ होने से पहले और बाद में भी संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। जल में खड़े होकर ही सूर्य को अर्घ्य दिया और परिवार केलिए सर्वमंगल की कामना की।
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- फोटो : प्रयागराज
लेटे हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने देश में अमन. शांति की स्थापना की कामना से संगम में डुबकी लगाई।ग्रहण की अवधि में दर्शन, पूजन अनुष्ठान बाधित रहा लेकिन इष्टदेव के निमित्त जाप जारी रहा। ज्यादातर लोगों ने राहु के मंत्र का जाप किया। ग्रहण के मौके पर लोगों ने अन्न और धन का दान भी किया। ग्रहण का दान लेने वालों की टोलियां मोहल्ले-मोहल्ले घूमकर आवाज लगाती हुई ग्रहण का दान लेती रहीं।
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सूर्य ग्रहण के दौरान लेटे हनुमान मंदिर में रहा सन्नाटा।