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क्राइम फाइल : मदरसे के हास्टल से बंदूकधारी उठा ले गए दो नाबालिग, नदी किनारे ले जाकर किया गैंगरेप

Thu, 18 Mar 2021 03:24 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
17 जनवरी 2007। शहर के इतिहास में यह रात शायद सबसे काली रातों में से एक मानी जाएगी। करेली के मदरसे में तीन बंदूकधारी घुसे और लड़कियों के हास्टल में घुस गए। लड़कियों को सामने खड़ा किया गया। उनके नकाब उतरवाए गए। इसके बाद दो नाबालिग लड़कियों को हैवान उठा ले गए। बगल में नदी के किनारे रात भर दरिंदों ने दोनों लड़कियों नोचा खसोटा।

सुबह होने से पहले दोनों को मदरसे के दरवाजे पर फेंककर भाग गए। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। तत्कालीन सपा सरकार बैकफुट पर आ गई थी। यह पहली घटना थी जिसमें अतीक ने अपने ही लोगों का मान सम्मान और समर्थन खो दिया था। पुलिस ने इस कांड में पांच रिक्शे वालों और दर्जी का काम करने वालों का पकड़ा था जिन्हें बाद में अदालत से राहत मिल गई। उन लोगों ने पुलिस पर फंसाने का आरोप लगाते हुए घटना में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया था। यह सवाल आज भी जिंदा है कि अगर वे असली आरोपी नहीं थे तो किसने इस कांड को अंजाम दिया था?
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
करेली के बाहरी इलाके महमूदाबाद में मदरसा स्थित था। वाराणसी बम धमाके के आरोपी वलीउल्लाह का भाई वसीउल्लाह इसका संचालक था। इलाहाबाद और आस पास के गरीब घरों की तमाम लड़कियां पढ़ाई करती थी। मदरसे में लड़कियों का हास्टल भी था। 17 जनवरी देर रात हास्टल के दरवाजे पर दस्तक हुई। अमूमन देर रात हास्टल में कोई नहीं आता था। अंदर से पूछा गया तो धमकी भरे अंदाज में तुरंत दरवाजा खोलने को कहा। दरवाजा खोला गया तो सामने तीन बंदूकधारी खड़े थे। तीनों अंदर घुसे। लड़कियां एक हाल में सोती थीं। वे सीधे वहीं पहुंच गए। धमकी और गाली गलौज के साथ लड़कियों से कहा गया कि वे नकाब खोल दें।

सामने मौत खड़ी थी। बेबस लड़कियों के सामने और कोई चारा नहीं था। बंदूकधारी दरिंदों ने उनमे से दो नाबालिग लड़कियों को चुना और अपने साथ ले जाने लगे। और लड़कियां हैवानों के पैरों में गिर गईं। रहम की भीख मांगी लेकिन शैतानों का दिल नहीं पसीजा। वे दोनों लड़कियों को उठा ले गए। बाहर उनके साथ दो लोग और शामिल हो गए। कुल पांच लोगों ने आगे नदी के किनारे दोनों लड़कियों के साथ कई कई बार दुष्कर्म किया। दोनों लड़कियों को सुबह होने से पहले लहूलुहान हालत में मदरसे के दरवाजे पर फेंक बदमाश भाग निकले।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
अगले दिन इस शर्मनाक कांड को छिपाने की पुरजोर कोशिश की गई। पुलिस ने सिर्फ छेड़खानी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया लेकिन अखबारों में छपने के बाद दो दिन बाद गैंगरेप समेत संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस की लापरवाही साफ थी। इस कांड में अशरफ के गुर्गों के शामिल होने के आरोप लग रहे थे। दो दिन बाद बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ से ही ऐलान कर दिया कि इस कांड में सत्ता से जुड़े कुछ नेता और उनके गुर्गे शामिल हैं। उनकी सरकार आई तो वे सीबीआई जांच कराएंगी।

इसके बाद प्रदेश में जैसे राजनीतिक भूचाल आ गया। जगह जगह धरना प्रदर्शन होने लगे। लोग जुलूस निकालने लगे। सरकार बैकफुट आ गई। आनन फानन में पुलिस ने इस कांड का खुलासा करते हुए करेली के इखलाख अहमद और नौशाद अहमद समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी दिखा दी। पांचों रिक्शा चलाने और दर्जी का काम करते थे। पुलिस के खुलासे पर चहुँओर सवाल उठे लेकिन उन्हें जेल भेज दिया गया। हालांकि बाद में सभी छूट गए। उन्होंने बाहर आकर बताया कि पुलिस ने दबाव डालकर उनसे इस कांड में शामिल होने का बयान लिया था। घटना में शामिल लोगों को आज तक नहीं पकड़ा जा सका।

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गैंगरेप - फोटो : फाइल फोटो

मायावती आईं थी इलाहाबाद, कहा था कराएंगी जांच

इस कांड से सरकार की कितनी किरकिरी हुई थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बसपा प्रमुख मायावती खुद इलाहाबाद आईँ थीं। 85 गाड़ियों का काफिला लेकर वे सीधे मदरसा पहुंची थीं। उन्होंने अतीक और गुर्गों पर सीधे आरोप लगाए थे। बसपा प्रमुख ने  सत्ता में आने पर सीबीआई जांच की बात कही थी। सिर्फ बसपा ही नहीं कांग्रेस भी काफी आक्रामक थी। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष को इलाहाबाद भेजा गया था। सामाजिक संगठन को प्रदेश स्तर पर विरोध कर रहे थे। बैकफुट पर आई सपा ने वरिष्ठ नेता अहमद हसन को यहां भेजा। उन्होंने लड़कियों के घर वालों को पांच पाच लाख का चेक देना चाहा लेकिन उन्होंने पैसे लेने से इनकार कर दिया।
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रेप - फोटो : DEMO Pics

सीबीआई जांच की हुई थी संस्तुति लेकिन नहीं हुई जांच

बसपा सरकार बनने के बाद इस कांड की जांच के लिए सीबीआई जांच की संस्तुति की गई थी। सीबीआई टीम यहां आकर एफआईआर समेत अन्य कागजातों को ले गई लेकिन जांच की नहीं। बाद में सीबीआई ने इस कांड सीबीआई के स्तर का न मानते हुए जांच से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला सीबीसीआईडी को सौंप दिया गया। लेकिन इस कांड के असली गुनाहगार आज तक नहीं पकड़े गए।

अतीक के सांठगांठ पर नपे थे एसओ

घटना के समय करेली के थानेदार राजेश कुमार सिंह थे। राजेश और अतीक के बीच सांठगांठ की खबरों के बीच एसएसपी बीडी पॉलसन ने एसओ राजेश सिंह को सस्पेंड कर दिया था। राजेश पर आरोप था कि गैंगरेप की सूचना देने के बाद भी उन्होंने पहली एफआईआर सिर्फ छेड़खानी की दर्ज की थी। बहुत दबाव पड़ने पर गैंगरेप की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।

अपने लोगों का मान सम्मान और समर्थन खोया था अतीक ने, फिर कभी नहीं जीता कोई चुनाव
अतीक अहमद के पराभव में मदरसा कांड का बहुत बड़ा योगदान है। जांच में अतीक और अशरफ की सीधी भूमिका का तो नहीं पता चला था लेकिन पुलिस सूत्रों ने बताया था कि असली गुनागारों को बचाने में अशरफ ने अपने रसूख का इस्तेमाल किया था। शहर का यह ऐसा कांड था जिसके बाद अतीक या उसके परिवार के किसी शख्स ने चुनाव नहीं जीता। इस कांड ने अतीक अपने लोगों का ही मान सम्मान और समर्थन खो दिया था।
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