फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुछ दवाएं, बेहतर आहार और क्वारंटीन से ठीक हुए कोरोना संदिग्ध मरीज

Thu, 23 Apr 2020 12:41 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
1 of 5
Corona testing - फोटो : PTI
कोरोना वायरस भले ही दुनिया भर में खौफ का सबब बना हुआ हो, लेकिन कोटवा बनीं के लेवल-1 अस्पताल में भर्ती नौ मरीजों का पूरी तरह से स्वस्थ हो जाना, इसका प्रमाण है कि इस घातक बीमारी से लड़ना मुश्किल नहीं है। यहां के चिकित्सक कहते हैं कि गाइडलाइन के मुताबिक दवाएं, बेहतर आहार और क्वारंटीन के जरिए इस बीमारी पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी अहम फैक्टर है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा जरूरी है मरीज का धीरज के साथ डॉक्टरों से सहयोग करना। 
विज्ञापन

2 of 5
corona - फोटो : PTI
अस्पताल के नोडल अफसर डॉ. विवेक कुमार मिश्रा के मुताबिक यहां भर्ती मरीजों को दो श्रेणियों में बांट दिया गया था। एक जो थोड़ा गंभीर हुए और दूसरे वे जिनमें लक्षण भी कम नजर आए। अस्पताल में भर्ती नौ मरीजों में से दो मरीज ऐसे थे, जिन्हें भर्ती होने के बाद दो-तीन दिनों तक थोड़ा परेशानी अधिक रही। उन्हें खासी के साथ, सांस लेने में भी तकलीफ  हुई और बुखार भी तेज होता गया। ऐसे में दो-तीन दिनों तक उनका ध्यान अधिक रखना पड़ा।
विज्ञापन

3 of 5
कोरोना वायरस की जांच - फोटो : Amar Ujala
बाकी मरीजों में कुछ ऐसे थे, जिन्हें बुखार आया तो उन्हें पैरासिटामाल दी गई। उससे उन्हें राहत मिल गई। दो-तीन दिन बाद तो उनमें तो कोरोना के लक्षण भी नजर नहीं आए। डॉ. विवेक ने बताया कि सभी नौ मरीजों को आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक एंटीएलर्जिक दवा एजिथ्रोमाइसिन, एंटीबायोटिक सिटिजिन हफ्ते भर सेवन की सलाह दी गई। कोरोना पॉजिटिव का उपचार करने वाले फिजिशियन डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि उनको ट्रेनिंग में भी यही जानकारी दी गई थी कि कुल मरीजों में 80 फीसदी को ज्यादा परेशानी नहीं होती है।

4 of 5
आइसोलेशन कक्ष - फोटो : अमर उजाला
20 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं, जो गंभीर अवस्था में पहुंच जाते हैं। डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि कोटवां-बनी में भर्ती मरीज ज्यादातर युवक थे और उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी थी। लिहाजा बीमारी का असर ज्यादा नहीं हो सका। आईसोलेशन अवधि के दौरान उन्हें पौष्टिक आहार भी मिला और शारीरिक गतिविधियां भी कम हो गईं। लिहाजा, शारीरिक ऊर्जा भी संकुचित हुई, जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ानेे में सहायक हुई। कोविड-19 लेवल-1 अस्पताल में प्रयागराज का एक, कौशांबी के दो और प्रतापगढ़ के छह मरीजों को भर्ती किया गया था। सभी ठीक होकर चले गए। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आइसोलेशन - फोटो : अमर उजाला

खाने-पीने में भी रखी सावधानी

अस्पताल में भर्ती सभी कोरोना मरीजों को खाने में विशेष ख्याल रखा गया। डॉ. वीके मिश्रा के मुताबिक मरीजों को सुबह सात बजे चाय, फिर नाश्ते में पोहा, नमकीन, बिस्किट, पकौड़ी दी गई। दोपहर भोजन में दाल, चावल, रोटी, हरे पत्तेदार सब्जी, राजमा आदि जाता। शाम चार बजे संतरा, केला सहित अन्य मौसमी फल और पांच बजे चाय के साथ नमकीन, बिस्किट दिया जाता। रात में दाल, चावल, रोटी, सब्जी दी गई। क्वारंटीन अवधि के दौरान यही क्रम बना रहा।

दूसरी टीम भी पैसिव क्वारंटीन में

अस्पताल से मरीजों को जाने के बाद चिकित्सकीय टीम को पैसिव क्वारंटीन में 14 दिनों के लिए भेज दिया गया है। उनकी भी कोरोना की जांच कराई जाएगी। इसके पहले पहली टीम को भी पैसिव क्वारंटीन में भेजा गया है। उसे गए सात दिन हो गए हैं। उनकी कोरोना जांच निगेटिव आई है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें