माघी पूर्णिमा पर रविवार को साधु-संतों और कल्पवासियों के शिविरों में मास पर्यंत चलने वाले यज्ञ-अनुष्ठानों की सविधि मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति हो गई। अखंड पाठ, जप, तप और ध्यान के अनुष्ठानों के संकल्प पूरे होने पर शिविरों में दिन भर भंडारे चले। संगम पर दान-पुण्य होता रहा।
संगम की रेती पर करीब 2500 बीघा क्षेत्रफल में छह सेक्टर में बसे माघ मेले के दो हजार से अधिक छोटे-बड़े शिविरों में सुबह ही अनुष्ठानों की पूर्णाहुतियां आरंभ हो गईं। त्रिवेणी मार्ग स्थित ज्योर्तिमठ हिमालय के शिविर में जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का संतों-भक्तों ने आशीर्वाद लिया।
संगम नोज स्थित गंगा सेना के शिविर में योग गुरु आनंद गिरि के सानिध्य में चल रहे मास पर्यंत महायज्ञ की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति हुई। इसी तरह द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिविर से भी संत और कल्पवासी विदा हुए। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का भी शिविर समेट लिया गया। इस शिविर में कल्पवास कर रहे गृहस्थ और संन्यासी आखिरी डुबकी के बाद विदा हुए। लवकुश मंदिर आश्रम अयोध्या के शिविर में भी पूर्णाहुति हुई।
संगम नोज स्थित गंगा सेना के शिविर में योग गुरु आनंद गिरि के सानिध्य में चल रहे मास पर्यंत महायज्ञ की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति हुई। इसी तरह द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिविर से भी संत और कल्पवासी विदा हुए। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का भी शिविर समेट लिया गया। इस शिविर में कल्पवास कर रहे गृहस्थ और संन्यासी आखिरी डुबकी के बाद विदा हुए। लवकुश मंदिर आश्रम अयोध्या के शिविर में भी पूर्णाहुति हुई।
महंत राम केवल दास महाराज के सानिध्य में महीने भर का यज्ञ पूर्ण हुआ। अपर संगम मार्ग पर स्थित काशी के प्रधान तीर्थ प्राचीन दशाश्वमेध के शीतला मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज ने भी मास पर्यंत अनुष्ठानों की सविधि पूर्णाहुति की। खाक चौक स्थित सतुआ बाबा के शिविर में महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने माघी पूर्णिमा स्नान के बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र का दान किया
इसके अलावा जगदीश रैंप के पास महामंडलेश्वर प्रेम दास महाराज के बालाजी आश्रम शिविर, वाहिगुरु शिविर, ऊं नम: शिवाय शिविर सेक्टर पांच स्थित डूंग जी महाराज के शिविर में अन्नक्षेत्र में हजारों की तादाद में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद वस्त्र का भी वितरण किया गया।
इसके अलावा मोरी मार्ग, दंडी स्वामी नगर के शिविरों में भी दिन भर पूर्णाहुतियां होती रहीं और मंत्र गूंजते रहे। रविवार को पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही कल्पवासी और श्रद्धालु शिविरों से विदा हो गए। सैकड़ों की तादाद में कल्पवासियों के शिविर खुल गए। देर रात तक सामान लेकर उनकेपरिजन दिन भर मेला क्षेत्र से निकलते रहे।