Akshyavat
महंत रवींद्र नाथ योगेश्वर का कहना है कि, 'मूल अक्षयवट के नाम पर सरकार राजनीति कर रही है। अनादी काल से लोग अक्षयवट पतालपुरी के दर्शन-पूजन करते आ रहे हैं। जिसे मूल अक्षयवट बताया जा रहा है, जो सेना के घेरे में है, वह कभी खुला ही नहीं था। उसकी कोई मान्यता भी नहीं है। यह राजनीति दांव-पेंच के तहत हिन्दुओं की आस्था से खिलावाड़ किया जा रहा है। अक्षयवट पतालपुरी के प्रमाण आज भी उपस्थित हैं, जिससे पता चलता है कि जो अक्षयवट पतालपुरी में है वहीं मूल अक्षयवट है।'