गंगा-यमुना और विलुप्त सरस्वती के संगम तट पर शुक्रवार को सूर्योपासना के लोकोत्सव की सांझ आस्था के अनंत उपहारों के मानिंद हर किसी को निहाल कर गई। ढोल, नगाड़ों, बैंजबाजे के साथ सौभाग्य का डाला सजाकर तटों पर षष्ठी के सूर्यदेव को विदा करने के लिए घर-घर से व्रतियों के साथ महिलाएं, बच्चे व बड़े निकल पड़े। गंगा-यमुना के तटों पर जलधारा में खड़ी होकर व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर घर, परिवार से लेकर सकल समाज तक की मनोरथ पूर्ति के लिए छठ मइया से अरजी लगाई। शनिवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती महिलाएं सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना के इस व्रत का पारण किया जाएगा।