कौशांबी में एलपीजी टैंकर विस्फोट में झुलसे कर्मचारियों ने कराहते हुए हादसे के दर्दनाक पल साझा किए। एक पीड़ित ने बताया कि तेज आवाज से नींद खुली तो देखा कि पूरा कमरा आग की लपटों से घिर चुका था। वह तख्त के नीचे घुस गए।
कौशांबी के मंझनपुर में एलपीजी टैंकर विस्फोट में झुलसे कर्मचारियों ने हादसे के उन खौफनाक पलों को बताया तो हर किसी की आंखें नम हो गई। अस्पताल में भर्ती हीरामणि दर्द से कराहते हुए बोले कि अगर वह तख्त के नीचे न घुसते तो जान चली जाती।
हादसे के बाद जब एचआर अनुज सिंह घायलों को अपनी गाड़ी से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो वह बदहवास होकर जोर-जोर से बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे। उनकी आवाज सुन सिक्योरिटी गार्ड दौड़ता हुआ डॉ. आशुतोष शर्मा के पास पहुंचा और बोला, साहब, इनको बचा लीजिए।
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आग में झुलसे लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डॉ. शर्मा ने तत्काल सभी वार्ड बॉय को बुलाया और बिना समय गंवाए पांचों घायलों का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया। गंभीर हालत देखते हुए सभी को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काफी देर तक हड़कंप मचा रहा।
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आग में झुलसे लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रायबरेली निवासी हीरामणि ने कहा कि भगवान की दया रही कि वह सिर्फ झुलसे हैं। उन्होंने कहा कि उनका इलाज करवा दिया जाए। उनके पास पैसा नहीं है। उन्होंने बताया कि धमाके के समय वह कमरे में सो रहे थे। तेज आवाज से नींद खुली तो देखा कि पूरा कमरा आग की लपटों से घिर चुका था। वह तख्त के नीचे घुस गए। उनके साथ कमरे में आलोक सिंह भी सो रहे थे।
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कोखराज टोल प्लाजा पर लगी आग की तस्वीर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हम न बचबै... कहकर छलक पड़े आंसू
कृष्ण पाल मौर्य ने बताया कि वह शौचालय में थे। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, आग की लपटों ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। अस्पताल में जब इशारे से कहा, हम न बचवै... और कृष्ण पाल से बात की गई तो उन्होंने उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।
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गैस टैंकर में धमाके के बाद लगी आग, कार और बाइकें भी जलीं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कर्मचारियों के कमरों तक पहुंचीं आग की लपटें
विस्फोट इतना भीषण था कि टोल प्लाजा के समीप बने कर्मचारियों के विश्राम कक्ष भी चपेट में आ गए। कमरे में सो रहे कर्मचारी झुलस गए। जबकि शौचालय में मौजूद एक कर्मचारी बाहर निकलते ही आग की लपटों में घिर गया। एचआर अनुज सिंह, टोल मैनेजर अनूप पांडेय और अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
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गैस टैंकर में धमाके के बाद लगी आग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आग बुझने पर केबिन में मिला चालक का शव
फायर ब्रिगेड ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद टैंकर की केबिन की तलाशी लेने पर चालक का जला हुआ शव सीट पर मिला। पहले उसके सुरक्षित निकल जाने की बात सामने आई लेकिन जांच में स्पष्ट हुआ कि वह केबिन से बाहर नहीं निकल सका। पुलिस ने शव के अवशेष पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं।
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गैस टैंकर में धमाके के बाद लगी आग, कार और बाइकें भी जलीं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हाईवे पर डेढ़ घंटे तक लगा लंबा जाम
हादसे के बाद कोखराज पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर करीब आधा किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब डेढ़ घंटे तक लंबा जाम लगा रहा। आग बुझने और जला टैंकर हटाने के बाद ही यातायात बहाल हो सका।
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टैंकर में लगी आग को बुझाते फायर कर्मी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घर लौटने का वादा रह गया
कोखराज टोल प्लाजा पर पर हुए हादसे ने मिर्जापुर के एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी। गैस टैंकर चालक धर्मेंद्र दुबे के केबिन में जिंदा जल जाने से पत्नी अनीता देवी और छह बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। घर से निकलते समय उन्होंने बच्चों से जल्द लौटने का वादा किया था, जो अब कभी पूरा नहीं हो सकेगा।
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आग में झुलसे टोल कर्मी को चार पाई से ले जाते लोग।
- फोटो : वीडियो ग्रैब
धर्मेंद्र दुबे पुत्र आत्मारमण दुबे निवासी नुआंव, पोस्ट सढंवा, थाना कोतवाली देहात, जनपद मिर्जापुर, करीब 17-18 वर्षों से गैस टैंकर चलाते थे। लगभग एक वर्ष घर पर रहने के बाद उन्होंने करीब 20 दिन पहले ही दोबारा नौकरी शुरू की थी।
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आगजनी में जली बाइकें व जनरेटर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भाई धीरज दुबे ने बताया कि धर्मेंद्र 20 जून को घर आए थे। एक दिन परिवार के साथ बिताने के बाद 21 जून को फिर ड्यूटी पर निकल गए। रवाना होने से पहले उन्होंने पत्नी अनीता देवी और अपने छह बच्चों श्रेया (17), सृष्टि (16), आर्या (12), आराध्या (10), दिव्यांशु (7) और प्रांशु (6) को प्यार किया और जल्द घर लौटने का भरोसा दिया था।
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गैस टैंकर से लगी आग में जला टोल ऑफिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बृहस्पतिवार रात खागा पार करने के बाद उन्होंने अन्नपूर्णा ढाबे पर भोजन किया। शुक्रवार तड़के लगभग पांच बजे औरैया के पाता से प्रयागराज के लिए निकले थे। सुबह करीब 6:30 बजे कोखराज टोल प्लाजा पर गैस टैंकर में भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से वह केबिन में ही फंस गए और जिंदा जलकर उनकी मौत हो गई। धीरज दुबे ने बताया कि हादसे की सूचना उन्हें धर्मेंद्र के साथी विजय पांडे ने फोन पर दी। जो उनके भाई के टैंकर से आगे चल रहे थे। सूचना मिलते ही वह अकेले घटनास्थल पहुंचे।
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झुलसे लोगों को एंबुलेंस से लेकर जाते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ढाई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पाया काबू
कोखराज टोल प्लाजा पर आग पर काबू पाने के लिए कौशाम्बी, प्रयागराज और प्रतापगढ़ के दमकल कर्मियों को संयुक्त अभियान चलाना पड़ा। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत और 10 टैंकर पानी के इस्तेमाल के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। मंझनपुर फायर स्टेशन प्रभारी अशोक कुमार यादव ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 6:45 बजे कोखराज टोल प्लाजा पर एलपीजी कैप्सूल टैंकर में गैस रिसाव के बाद आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही मंझनपुर, चायल, सिराथू और पश्चिम शरीरा फायर स्टेशन से दमकल वाहन मौके के लिए रवाना किए गए।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रयागराज से एक अतिरिक्त फायर टेंडर और प्रतापगढ़ से भी दमकल टीम बुलाई गई। मौके पर कौशाम्बी के 22 और प्रयागराज और प्रतापगढ़ के चार-चार दमकल कर्मियों समेत कुल 30 कर्मियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। इस दौरान मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) मंगेश कुमार स्वयं मौके पर मौजूद रहे। पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस फोर्स ने घटनास्थल को घेरकर सुरक्षा व्यवस्था संभाली और लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखा।