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नगर निगम प्रयागराज के कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा का परचम पर दमदार प्रत्याशी हारा

Sat, 13 Jun 2020 01:09 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में शुक्रवार को भाजपा का परचम एक बार फिर लहराया लेकिन सबसे सशक्त प्रत्याशी अखिलेश सिंह को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में भाजपा के चार, सपा और कांग्रेस के एक-एक प्रत्याशी विजयी हुए। मिनी सदन में दूसरे बड़े दल सपा के अजय यादव भी वोटों की गणित गड़बड़ाने से पराजित हो गए। सपा, कांग्रेस में क्रास वोटिंग हुई जबकि भाजपा जीत के वोटों का जुगाड़ नहीं कर सकी।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
करीब छह महीने देरी से हुए कार्यकारिणी चुनाव के लिए भाजपा ने पांच, सपा ने दो और कांग्रेस ने एक प्रत्याशी को अधिकृत किया। शुक्रवार सुबह नामांकन के बाद मतदान के दौरान गहमागहमी रही। पार्षदों के साथ सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, केशरी देवी पटेल, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, भाजपा विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, एमएलसी सुरेश त्रिपाठी और वासुदेव यादव ने भी मताधिकार का प्रयोग किया। 
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी की अध्यक्षता में सचिव परिषद पीके मिश्रा ने चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई। महापौर के मुताबिक कुल 89 मतों में 86 मत पड़े। छह वोट अवैध घोषित किए गए। प्रथम वरीयता के 14-14 मत पाकर पहले राउंड में भाजपा के जगमोहन, और नंदलाल को विजयी घोषित किया गया। 
मतगणना के दूसरे राउंड में भाजपा के अमरजीत सिंह 11 मत पाकर विजयी हुए।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj
वहीं, तीसरे राउंड की मतगणना में भाजपा के कमलेश तिवारी दस मत, कांग्रेस की अल्पना निषाद दस मत और आठ मत पाकर सपा के मो. आजम विजयी हुए। भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बने इस चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी अखिलेश सिंह को प्रथम वरीयता के मात्र सात वोट मिले। वहीं सपा के अजय यादव को मात्र छह वोटों से संतोष करना पड़ा। 

परिणाम घोषित होने के बाद विजयी प्रत्याशियों को साथियों ने फूल मालाएं पहनाईं और मिठाई खिलाई। इस दौरान अगल-अलग दलों के समर्थकों ने नारेबाजी भी की। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने सभी निर्वाचित सदस्यों को बधाई दी।                                                                        त
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nagar nigam prayagraj - फोटो : प्रयागराज

भितरघात, अदूरदर्शिता से मिली हार पर सवाल

नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अखिलेश सिंह की हार से संगठन की अदूरदर्शिता सामने आई है। साफ है बूथ मैनेजमेंट और बाहरी वोटों के जुगाड़ में भितरघात भारी पड़ा। वहीं मिनी सदन में संख्या बल से दूसरी बड़ी पार्टी सपा को क्रास वोटिंग से बड़ा झटका लगा। दस पार्षदों वाली कांग्रेस पार्टी ने निर्दलियों को साधकर विजय अपने नाम कर ली। 

कार्यकारिणी चुनाव परिणाम से साफ है कि भाजपा ने प्रत्याशियों के लिए प्रस्तावक और वोटों का क्रमांक तो तय किया लेकिन उसे परिणाम तक नहीं पहुंचा सकी। प्रथम वरीयता के 12 मतों की जरूरत के बाद भी पहले राउंड में पार्टी के दो प्रत्याशियों को 14-14 मत मिले। वहीं दूसरे, तीसरे राउंड में मतों का
 बिखराव गवाही दे रहा है कि भाजपा का बूथ मैनजमेंट गड़बड़ा गया।

नगर निगम सदन में संख्या बल के लिहाज से सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते ही भाजपा ने पांच प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा। इससे पहले हुए चुनाव में सभी को जिताया भी लेकिन इस बार व्हिप जारी होने के बाद भी भितरघात हावी रहा। भाजपा के नगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी का कहना है कि पार्टी के पार्षदों ने निर्देशों के मुताबिक मतदान किया। सबको जिम्मेदारियां दी गई थीं। 
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मतपत्र (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

व्यक्तिगत प्रबंधन में बाधा ने परिणाम बदले।

भाजपा के सबसे सशक्त प्रत्याशी माने जा रहे पार्षद अखिलेश सिंह हार से आहत होकर संगठन पर तोहमत मढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि किसी को 14 मत मिलें और किसी को सात मत, जबकि किसको किस वरीयता का मत 

देना है, इस पर निर्णय पार्टी ने लिया था। उन्होंने कहा कि हम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष बनने की दौड़ में न होते तो सदस्य का चुनाव न हारते। वोट मैनेजमेंट उनके पक्ष में न करने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। 

नगर निगम सदन में समाजवादी पार्टी संख्या बल के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी पार्टी हैं। पार्टी के पार्षद 24 हैं जिसमें एक किसी मामले में कारागार में बंद हैं। इसीलिए पार्टी ने दो पार्षदों को ही 

चुनाव मैदान में उतारा। फिर भी पार्टी प्रत्याशी मो. आजम आठ मत पाकर तीसरे राउंड में किसी तरह जीत सके। वहीं दूसरे प्रत्याशी अजय यादव को सिर्फ छह मत मिले। साफ है कि क्रास वोटिंग के कारण उनकी हार हुई। पार्टी स्तर पर इस पर मंथन शुरू हो गया है। सपा के निवर्तमान अध्यक्ष इफ्तेखार हुसैन ने कहा कि पार्षदों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। पूरे मामले की समीक्षा होगी कि गणित कहां गड़बड़ाया। इससे शीर्ष नेतृत्व को भी अवगत कराया जाएगा।

वोटों की गणित साधने में कांग्रेस सबसे तेज रही। कार्यकारिणी सदस्य के लिए घोषित प्रत्याशी अल्पना निषाद ने निर्दलियों को साध लिया। पार्टी में विरोध को भांपकर किया गया वोटों का जुगाड़ अल्पना की विजय में सहायक बना। शहर अध्यक्ष कांग्रेस नफीस अनवर अल्पना की जीत से संतुष्ट है, उनका कहना है कि संख्या बल का सही उपयोग किया गया। 

अब नजर उपाध्यक्ष के चुनाव पर लगी

कार्यकारिणी सदस्यों के चुनाव के बाद पार्षदों की नजर अब कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पर लगी है। संख्या बल के हिसाब से भाजपा मजबूत है, लेकिन 12 सदस्यों में आठ भाजपा के हैं, इस लिहाज से पार्टी के घोषित प्रत्याशी सत्येंद्र चोपड़ा निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं। यदि चुनाव हुआ और भितरघात हावी रहा तो भाजपा के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी के मुताबिक अगले सप्ताह शनिवार तक उपाध्यक्ष का चुनाव करा लिया जाएगा। 

जब राहुल गांधी अमर रहे के नारे लगे

नगर निगम परिसर में शुक्रवार शाम तब अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के बाद पार्टी के लोग नारे लगाने लगे। इसी बीच राहुल गांधी अमर रहें का नारा लगते ही लोग सकते में आ गए। टोकाटाकी पर नगर अध्यक्ष नफीस अनवर ने लोगों को चुप कराया। उन्होंने कहा कि ऐसा उन्होंने सुना नहीं, हो सकता है कि गलती हो गई हो।
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