मकर संक्रांति पर होने वाले प्रथम शाही स्नान से पहले अखाड़ों, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं, पुरोहितों और कल्पवासियों के शिविरों से संगम की रेती सज गई है। गंगा तीरे शनिवार को कहीं शंख, डमरू, घंट-घड़ियाल की गूंज सुनाई देने लगी तो कहीं यज्ञशालाओं में वेदपाठी बटुकों के सस्वर मंत्रोच्चार गूंजने लगे।