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विवादों ने आखिरकार छीन ली कुलपति से कुर्सी

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इविवि कुलपति रतन लाल हंगलू - फोटो : Prayagraj

पदभार ग्रहण करने के साथ ओएसडी की नियुक्ति पर उठने लगे थे सवाल
29 दिसंबर को नियुक्ति के चार वर्ष पूरा करने के बाद दिया इस्तीफा


प्रयागराज। नए वर्ष के पहले दिन अपने पद से इस्तीफा देने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में बीते 29 दिसंबर को चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले प्रो. रतन लाल हांगलू अपने पूरे कार्यकाल के दौरान विवादों में रहे। कुलपति के रूप में पदभार संभालने के बाद प्रो. हांगलू अपने ओएसडी की नियुक्ति को लेकर सवालों में आए।

 
ओएसडी पद पर नियुक्ति पाने के बाद अमित सिंह सीएमपी डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति पा गए। अमित सिंह पर अपने प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी करके नियुक्ति हासिल करने का आरोप लगने के बाद भी कुलपति ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। ओएसडी और उसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अमित सिंह की नियुक्ति को लेकर विवि के छात्रों की ओर से गंभीर सवाल उठाए गए।


कोर्ट के आदेश के बाद भी मनमानी करते रहे
कुलपति के पदभार ग्रहण करने के समय कार्यवाहक कुलपति रहे प्रो. ए सत्यनारायण को डीन के पद से हटाने का मामला हो अथवा विवादों में रहे कुछ शिक्षकों को महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति का, प्रो. हांगलू ने हर आरोप की अनदेखी की। सुप्रीम कोर्ट से आदेश होने के बाद भी कुलपति ने प्रो. सत्यनाराण को डीन का पदभार नहीं सौंपा। इसके अलावा विवि में अवकाश प्राप्त शिक्षकों की दोबारा नियुक्ति तथा बिना विज्ञापन के विवि में कुछ पदों पर नियुक्ति मामले में कुलपति ने हमेशा मनमानी की।


रजिस्ट्रार सहित महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में अपनी मर्जी
विवि में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और पीआरओ की नियुक्ति को लेकर कुलपति का पूरा कार्यकाल विवाद में रहा। विवि के एक प्रोफेसर को रजिस्ट्रार पद पर नियुक्त करने के लिए कुलपति ने बड़े दांव चले। इसके अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों को स्वायत्तता देने और वहां पीजी कक्षाएं चलाने की मंजूरी देने अथवा शिक्षक भर्ती के मामले को लेकर भी विवाद रहा।


महिला आयोग ने पीआरओ नियुक्ति पर उठाया था सवाल
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इविवि में कुलपति की ओर से पीआरओ की नियुक्ति को सवालों के घेरे में लिया था। महिला आयोग की सदस्य ने सवाल उठाया था कि एक ऐसे शिक्षक को पीआरओ कैसे नियुक्त कर दिया गया, जो अभी तक प्रोबेशन भी पूरा नहीं कर सका है। महिला आयोग ने कुलपति को एक महिला के साथ बातचीत का ऑडियो लीक होने और महिला छात्रावास की सुरक्षा मामले में तलब किया। महिला आयोग की ओर से तलब किए जाने के मामले को लेकर सबसे अधिक पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा महत्वपूर्ण भूमिका में रहीं। उन्होंने एक दिन पहले प्रदेश के राज्यपाल एवं डीजीपी से मिलकर कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।


प्रो. हांगलू के कार्यकाल में पांच सौ से अधिक छात्रों पर कार्रवाई
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में प्रो. हांगलू की नियुक्ति के बाद लगभग पांच सौ छात्रों का निष्कासन और निलंबन हुआ। इनमें सबसे चर्चित कार्रवाई कुलपति के खिलाफ आवाज उठाने वाले इविवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सचिव रोहित मिश्र के निलंबन एवं निष्कासन की रही। रोहित मिश्र ने लगातार कुलपति के खिलाफ आंदोलन जारी रखा। रोहित के ही साथ छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष एवं शोध छात्रा ऋचा सिंह ने कुलपति के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले रखा। महिला आयोग के पास शिकायत से लेकर राज्यपाल, राष्ट्रपति, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूजीसी सब जगह ऋचा ने कुलपति की शिकायत की। विवि से निष्कासन एवं निलंबन के बाद कई छात्रों का करिअर खत्म हो गया।


इविवि के इतिहास में दूसरे कुलपति ने बीच में छोड़ी कुर्सी
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास में कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू दूसरे ऐसे कुलपति हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बीच में ही कुर्सी छोड़ दी। इससे पूर्व प्रोफेसर एके सिंह ने विवादों में रहने के कारण कुलपति रहते हुए त्यागपत्र दिया था। 


हालांकि कुलपति प्रो. रतनलाल हंागलू के कार्यभार संभालते ही वह चौतरफा विवाद में घिर गए थे। कभी महिलाओं से कथित ऑडियो में अभद्र टिप्पणी करते हुए उनके विरोधियों ने उन पर निशाना साधा तो कभी महिला उत्पीड़न के किसी अन्य मामले में वह निशाने पर रहे। पहली बार उन्हें महिला छात्रावास परिसर में छात्राओं की सुरक्षा के मसले पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने तलब किया। महिला आयोग कुलपति के जवाब से संतुष्ट नहीं था और आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने अमर उजाला से हुई खास बातचीत में यह स्पष्ट कर दिया था की कुलपति के खिलाफ  कार्रवाई के लिए वह प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखेंगी।
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कुलपति की नेतृत्व क्षमता पर उठते रहे सवाल

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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति प्रो. रतन लाल हंगलू का घेराव करते छात्र।--फाइल फोटो। - फोटो : Prayagraj
 इविवि के परफॉर्मेंस ऑडिट पर आई टीम ने लिया था आड़े हाथों
 तत्कालीन वित्त अधिकारी की नियुक्ति पर भी उठाए थे गंभीर सवाल


प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. आरएल हांगलू में नेतृत्व क्षमता का अभाव है। वह एक छोटी से मंडली के साथ विश्वविद्यालय चला रहे हैं। यह गंभीर टिप्पणी की थी कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसीसी) की पांच सदस्यीय कमेटी ने, जिसे वर्ष 2017 के नवंबर माह में परफॉर्मेंस ऑडिट के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भेजा गया था। यह कमेटी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, बंगलुरू के प्रो. गौतम देसी राजू की अध्यक्षता में यहां जांच करने आई थी।


कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कुलपति में नेतृत्व क्षमता का अभाव है। उन्होंने खुद को एक खराब प्रबंधक साबित किया। वह अधिकारों के बंटवारे और प्रशासन के विकेंद्रीकरण में भी नाकाम रहे। वह रोजमर्रा होने वाली समस्याओं में ही उलझे रह गए। कमेटी ने जो देखा, उसके अनुसार विश्वविद्यालय को कुलपति और उनकी एक छोटी सी मंडली चला रही है। कुलपति ने सारी शक्ति अपने पास रखी हैं या इस मंडली को सौंप दी हैं। छात्रों और आम अध्यापकों के साथ उनका कोई संपर्क नहीं रह गया है। कमेटी के सदस्यों ने यह भी कहा है कि बाकी विश्वविद्यालयों में भी प्रबंधन को कम महत्व दिया जाता है लेकिन, इविवि में तो प्रबंधन नाम की कोई चीज ही नहीं रह गई है।



यहां कोई काम दूरदृष्टि से नहीं हो रहा है। रोज उत्पन्न होने वाली समस्याओं में ही इनकी ऊर्जा समाप्त हो जा रही है। एक समस्या खत्म होती है तो दूसरी समस्या के आने का इंतजार किया जाता है। कमेटी ने वित्त अधिकारी के पद पर तत्कालीन प्रो. एनके शुक्ला को नियुक्त किए जाने पर भी सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक प्रोफेसर को सौंप देना किसी भी दशा में उचित नहीं है। हालांकि, कमेटी की इस आपत्ति के बाद प्रो. एनके शुक्ला को इविवि का रजिस्टर बना दिया गया।
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नए साल के पहले दिन मुंह पर काली पट्टी बांधकर जारी रखा आंदोलन

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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति प्रो. रतन लाल हंगलू का घेराव करते छात्र।--फाइल फोटो। - फोटो : Prayagraj
कुलपति को हटाने के लिए पुलिस के विरोध के बाद भी महिला छात्रावास पर संयुक्त संघर्ष समिति का आंदोलन जारी रहा। संयुक्त संघर्ष समिति ने ईसीसी के सांस्कृतिक मंत्री जितेश शुक्ल के असामयिक निधन पर दुख व्यक्त किया। अंादोलन का नेतृत्व कर रहीं पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह, पूर्व अध्यक्ष दिनेश यादव ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। नए साल के पहले दिन छात्राओं ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर आंदोलन जारी रखा। इस मौके पर अखिलेश यादव, उपमंत्री सत्यम सनी, अजय सम्राट, ज्योत्सना, तनु, जितेंद्र धनराज, सत्यम कुशवाहा, मसूद अंसारी, संदीप साहू अजय बागी आदि मौजूद रहे।

कुलपति के खिलाफ छात्र राज्यपाल से मिले

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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति का घेराव करने जातीं छात्राएं।--फाइल फोटो। - फोटो : Prayagraj
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बुधवार को संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में छात्रनेता रजनीश सिंह रिशु ने प्रदेश के राज्यपाल से मुलाकात की। छात्रों ने उन्हें कुलपति की अनियमितताओं की जानकारी दी। इस दौरान पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री रजनीश त्रिपाठी, आनंद सिंह शामिल रहे।
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कुलपति के हटते ही प्रॉक्टर, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी, पीआरओ ने भी पद छोड़ा

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प्रो. राम सेवक दूबे। (प्राक्टर इविवि) - फोटो : Prayagraj

प्रो. हांगलू के पूरे कार्यकाल में सबसे करीबी रहे प्रो. एनके शुक्ला ने कई पद संभाले

प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के इस्तीफा देने के बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे, रजिस्ट्रार प्रो. एनके  शुक्ला, वित्त अधिकारी डॉ. सुनील कांत मिश्र, पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। कुलपति के पद छोड़ देने के बाद अपने पद से त्यागपत्र देते हुए चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने कहा कि प्रॉक्टर का पद कुलपति प्रसाद पर्यंत होता है, ऐसे में उनके पद छोड़ देने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ के अध्यक्ष और प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने पद छोड़ने के बाद कहा कि अब वह प्रॉक्टर के दायित्व से मुक्त होने के बाद 2020 में मुक्त होकर शिक्षण कार्य करेंगे। प्रो. दुबे के कार्यकाल में पांच सौ से अधिक छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।



पहले प्रॉक्टर और बाद में वित्त अधिकारी और रजिस्ट्रार का पद संभालने वाले प्रो. एनके शुक्ला ने भी कुलपति के हटने के बाद पद छोड़ दिया। वह प्रो. हांगलू के पूरे कार्यकाल के दौरान उनके करीबी बने रहे। इविवि महाविद्यालय अध्यापक संघ के अध्यक्ष रहे और सीएमपी डिग्री कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनील कांत मिश्र भी कुलपति के करीबी रहे। कॉलेजों में पीजी कक्षाएं और शिक्षकों के पद भरने के मामले में उन्होंने अपना सही तरीके से पक्ष रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विवि के पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार की भूमिका को लेकर महिला आयोग ने भी सवालिया निशान उठाया था। चित्तरंजन ने स्वीकार किया कि कुलपति के हटने के बाद वह बृहस्पतिवार को अपना पद छोड़ देंगे।
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कश्मीर के बीते कल और आजको बखूबी बयां करेगा उपन्यास

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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति कार्यालय पर हंगामा करते छात्र। इस दौरान प्रो. रतन लाल हंगलू को बाहर निकालते सुरक्षाकर्मी--फाइल फोटो। - फोटो : Prayagraj

 कथा लेखिका भूमिका अश्क ने कहा, वाइस चांसलर प्रो.रतन हांगलू से मिलीं कश्मीर से जुड़ीं अहम जानकारियां


प्रयागराज। नीलाभ अश्क की पत्नी और कथा लेखिका भूमिका अश्क जिस नए उपन्यास की तैयारी में हैं, वह कश्मीर की पृष्ठभूमि पर केंद्रित है। इसमें कश्मीर के सुनहरे दिनों से लेकर वहां के मौजूदा हालात तक को बयां करने की कोशिश है। यह एक ऐसे कश्मीरी युवक की कहानी है जो दस भाई-बहनों वाला है। वह बहुत सुंदर, बहुत प्रतिभाशाली, बहुत अनुभवी और बहुत संघर्षो से आगे बढ़ा हुआ इंसान है। लेकिन,  उसने जिस बहुत खूबसूरत कश्मीर को देखा था, आज उसकी दुर्गति को भी देख रहा है और इसीलिए बहुत दुखी है।


‘अमर उजाला’ से बातचीत में भूमिका ने उपन्यास लेखन से जुड़े अनुभवों को साझा किया। बकौल भूमिका, इस उपन्यास के तथ्यों और जमीनी हकीकत के लिए मुझे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू से काफी मदद मिली। दरअसल, बीते दिनों मीरा फाउंडेशन की ओर से मीरा स्मृति पुरस्कार समारोह में शामिल होने के दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर ही मेरा उनसे परिचय हुआ। औपचारिक मुलाकात के दौरान उन्होंने अश्क जी से अपने लगाव के बारे में बताया। यह भी कि उन्हें पिता जी की किताब ‘पत्थर अल पत्थर’ बहुत अच्छी लगी।



वहीं चर्चा के दौरान मैंने उनसे अपने उपन्यास की चर्चा करते हुए कहा था, आप कश्मीरी हैं, इसलिए आप मेरे उपन्यास के बारे में मुझे जानकारियां दे सकते हैं। फिर तो अश्क परिवार के पारिवारिक मित्र की हैसियत से जब उनका दिल्ली आना हुआ तो वह घर भी आए और कश्मीर से जुड़े मसलों पर चर्चा की। इस बारे में कई बार उनसे फोन पर भी बातचीत हुई। उन्होंने चालीस वर्षों तक वहां रहकर कश्मीर को करीब से देखा है। उनके अनुभवों से ही मुझे बदलते कश्मीर, वहां के प्राकृतिक सौंदर्य, कश्मीर की पृष्ठभूमि, वहां की रोजमर्रा की जिंदगी, वहां के शहरों, सड़कों के नाम आदि के बारे में काफी जानकारियां मिलीं। फिलहाल किताब का एक चैप्टर ‘जन्नत’ पूरा होना अभी बाकी है, पर किताब जल्द ही पाठकों तक पहुंचेगी।
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हांगलू को ले डूबी शिक्षक भर्ती में धांधली की शिकायत 

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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति प्रो. रतन लाल हंगलू का घेराव करते छात्र।--फाइल फोटो। - फोटो : Prayagraj
 विश्वविद्यालय में पूरी हो चुकी भर्तियों पर भी कसेगा जांच का शिकंजा
 इविवि में शिक्षक भर्ती को लेकर शुरू से विवादों में रहे कुलपति प्रो. हांगलू




प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को शिक्षक भर्ती में धांधली की शिकायत ले डूबी। विश्वविद्यालय और संगठक महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती पर व्यापक पैमाने पर हुई धांधली की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की गई थी। इस शिकायत के बाद से ही मंत्रालय ने नौ माह पहले इविवि में शिक्षक भर्ती पर रोक लगा दी थी।


 
हालांकि कुछ दिनों पहले ही मंत्रालय ने शिक्षक भर्ती पर लगी रोक हटा ली लेकिन, अचानक कुलपति प्रो. हांगलू के इस्तीफे से इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। ऐसे में इविवि के जिन विभागों और कॉलेजों में शिक्षक भतीं पूरी हो चुकी है, वे अब फिर से जांच के दायरे में आ गई हैं। इविवि के तमाम पूर्व शिक्षक और छात्र नेता भी केंद्र सरकार से लगातार यह मांग कर रहे हैं कि अब तक हुई शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच कराई जाए।



इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग एवं कुछ अन्य विभागों के साथ सीएमपी डिग्री कॉलेज, एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज और जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती पर व्यापक पैमाने पर धांधली की शिकायत की गई थी और हर बार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एवं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिकायत की जांच कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रत्र लिखा लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलपति के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच उन्हीं के मातहतों से करा दी। 


ऐसे में जांच के दौरान क्लीन चिट तो मिल गई लेकिन भर्तियों मे धांधली के खिलाफ लगातार आवाज उठती रही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अप्रैल 2019 में शिक्षक भर्ती के लिए नया विज्ञापन भी जारी कर दिया, जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के 558 पदों पर भर्ती निकाली गई। लगातार शिकायतें आने पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नौ माह पहले भर्तियों पर फिर रोक लगा दी। रोक लगाए जाने के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार शुरू कर दिया गया। यहां तक कि ऑटा और ऑक्टा के कुछ नेताओं ने यह चेतावनी भी दे दी कि शिक्षक भती शुरू नहीं हुई तो आगामी चुनाव में सरकार के खिलाफ अभियान चलाएंगे।



इन तमाम विवादों के बीच केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने साल के अंतिम महीने (दिसंबर) में शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति दे दी। ऑटा और ऑक्टा की ओर से इस बात का प्रचार शुरू कर दिया गया कि केंद्र सरकार ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को क्लीन चिट दे दी है लेकिन यह खबर सामने आते ही प्रयागराज में शिक्षक भर्ती की अनुमति दिए जाने को लेकर फिर से व्यापक पैमाने पर विरोध शुरू हो गया। इस विरोध के बीच कुलपति का इस्तीफा आने के बाद इविवि में आगामी शिक्षक भर्ती भी विवादों में फंस गई है।

भूमिका की शिकायत पर एसटीएफ ने की थी जांच

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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति कार्यालय पर हंगामा करते छात्र।--फाइल फोटो। - फोटो : Prayagraj
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतन हांगलू के इस्तीफे के पीछे कारणों में एक साहित्यकार भूमिका द्विवेदी से जुड़ा मामला भी है। भूमिका ने आरोप लगाया था कि दिल्ली स्थित उनके घर पर हमला किया गया। वहां रिपोर्ट भी दर्ज हुई। भूमिका ने अपनी शिकायत में हांगलू का जिक्र किया, जिसकी एसटीएफ ने जांच भी की थी। हालांकि इसके बाद हुआ कुछ नहीं।


दरअसल, भूमिका के आरोप लगाने के बाद ही कुलपति विवादों के घेरे में आ गए। इसके बाद तो छात्र-छात्राआें ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भूमिका मामले में डीजीपी से शिकायत के बाद एसटीएफ को मामले की जांच सौंपी गई थी। डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने जांच शुरू भी की थी। इस प्रकरण में विश्वविद्यालय के शिक्षक दो भागों में बंट गए थे। एक गुट कुलपति के समर्थन में था तो दूसरा उनके विरोध में। यह प्रकरण काफी दिनों तक चर्चा में रहा। उधर, इस मामले में भूमिका द्विवेदी से फोन पर बात की गई लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। उनका कहना था कि अब इस विषय में कुछ भी नहीं बोलना चाहतीं। उन्होंने शिकायत की थी। कमेटी ने जांच की है। सारी बातें वह पहले कह चुकी हैं। अब इस बारे में वह कोई भी बयान देना नहीं चाहतीं। 
 

इविवि के पूर्व कुलपतियों से बातचीत

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बवाल 5 - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
इविवि में होगा भ्रष्टाचार का खात्मा, एजुकेशन सिस्टम में आएगा सुधार


इलाहाबाद विश्वविद्यालय को चाहने वालों के लिए बहुत खुश होने वाला पल है। कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के इस्तीफे के बाद इविवि में भ्रष्टाचार का खात्मा होगा, इविवि के एजुकेशन सिस्टम में सुधार होगा। नए कुलपति के आने पर प्रो. हांगलू की ओर से किए गए गलत कार्यों पर ध्यान देना होगा। कुलपति के खिलाफ आंदोलन करने वालों के लिए साल के पहले दिन इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती।
-प्रो. सीएल खेत्रपाल, पूर्व कुलपति इलाहाबाद विश्वविद्यालय


- इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीते चार वर्ष में जो शैक्षिक अराजकता रही है, वह कुलपति के जाने के बाद दूर होगी। उनके जाने के बाद विवि में शैक्षिक प्रगति होगी। छात्रों, शिक्षकों की आवाज सुनी जाएगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की उनकी मातृ संस्था है, वह हमेशा उसके उत्थान की कामना करते हैं।
-प्रो. ए सत्यनारायण, पूर्व कुलपति इलाहाबाद विश्वविद्यालय

 -इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के हटने से हमारा विश्वविद्यालय बच गया। विवि में व्याप्त शैक्षिक अराजकता अब दूर होगी। प्रो. हांगलू के कार्यकाल में जितने भी भ्रष्टाचार हुए हैं, सभी की जांच कराके उसमें लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। आज का दिन कुलपति के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले छात्रों की जीत का दिन है।
-प्रो. राम किशोर शास्त्री, इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ के पूर्व अध्यक्ष



 कुलपति प्रो. हांगलू का हटना इविवि के हित में रहा। भ्रष्टाचार में लिप्त कुलपति के हटने के बाद अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय तेजी से विकास करेगा। विवि का एक शिक्षक होने के नाते वह अपने जीवन पर्यंत इस संस्था की भलाई के लिए काम करते रहेंगे।
-प्रो. एके श्रीवास्तव, पूर्व डीन विज्ञान संकाय

हांगलू को ले डूबी शिक्षक भर्ती में धांधली की शिकायत 

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इविवि - फोटो : Prayagraj
विश्वविद्यालय में पूरी हो चुकी भर्तियों पर भी कसेगा जांच का शिकंजा
इविवि में शिक्षक भर्ती को लेकर शुरू से विवादों में रहे कुलपति प्रो. हांगलू



प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को शिक्षक भर्ती में धांधली की शिकायत ले डूबी। विश्वविद्यालय और संगठक महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती पर व्यापक पैमाने पर हुई धांधली की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की गई थी। इस शिकायत के बाद से ही मंत्रालय ने नौ माह पहले इविवि में शिक्षक भर्ती पर रोक लगा दी थी। 


हालांकि कुछ दिनों पहले ही मंत्रालय ने शिक्षक भर्ती पर लगी रोक हटा ली लेकिन, अचानक कुलपति प्रो. हांगलू के इस्तीफे से इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। ऐसे में इविवि के जिन विभागों और कॉलेजों में शिक्षक भतीं पूरी हो चुकी है, वे अब फिर से जांच के दायरे में आ गई हैं। इविवि के तमाम पूर्व शिक्षक और छात्र नेता भी केंद्र सरकार से लगातार यह मांग कर रहे हैं कि अब तक हुई शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच कराई जाए।



इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग एवं कुछ अन्य विभागों के साथ सीएमपी डिग्री कॉलेज, एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज और जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती पर व्यापक पैमाने पर धांधली की शिकायत की गई थी और हर बार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एवं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिकायत की जांच कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रत्र लिखा लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलपति के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच उन्हीं के मातहतों से करा दी। 


ऐसे में जांच के दौरान क्लीन चिट तो मिल गई लेकिन भर्तियों मे धांधली के खिलाफ लगातार आवाज उठती रही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अप्रैल 2019 में शिक्षक भर्ती के लिए नया विज्ञापन भी जारी कर दिया, जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के 558 पदों पर भर्ती निकाली गई। लगातार शिकायतें आने पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नौ माह पहले भर्तियों पर फिर रोक लगा दी। रोक लगाए जाने के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार शुरू कर दिया गया। यहां तक कि ऑटा और ऑक्टा के कुछ नेताओं ने यह चेतावनी भी दे दी कि शिक्षक भती शुरू नहीं हुई तो आगामी चुनाव में सरकार के खिलाफ अभियान चलाएंगे।


इन तमाम विवादों के बीच केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने साल के अंतिम महीने (दिसंबर) में शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति दे दी। ऑटा और ऑक्टा की ओर से इस बात का प्रचार शुरू कर दिया गया कि केंद्र सरकार ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को क्लीन चिट दे दी है लेकिन यह खबर सामने आते ही प्रयागराज में शिक्षक भर्ती की अनुमति दिए जाने को लेकर फिर से व्यापक पैमाने पर विरोध शुरू हो गया। इस विरोध के बीच कुलपति का इस्तीफा आने के बाद इविवि में आगामी शिक्षक भर्ती भी विवादों में फंस गई है।
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स्थायी कुलपति के आने के बाद खुलेगा भर्ती का रास्ता

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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी
 अब तक प्रो. केएस मिश्र संभालते रहे हैं प्रभारी की जिम्मेदारी
 प्रो. मिश्र भी 15 को होंगे रिटायर, सर्च कमेटी चुनेगी नया वीसी


प्रयागराज, 1 जनवरी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के इस्तीफे के बाद अब नए स्थायी कुलपति की नियुक्ति से ही इविवि में शिक्षक भर्ती का रास्ता खुलेगा। पिछले कई दिनों ने प्रो. हांगलू के छुट्टी पर रहने के दौरान के शिक्षा शास्त्र के प्रो. केएस मिश्र ही प्रभारी कुलपति की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन वह भी 15 जनवरी को रिटायर होने जा रहे हैं।


कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू जब भी छुट्टी पर जाते हैं, तो उनकी जगह इविवि के विरिष्ठतम शिक्षक प्रो. केएस मिश्र को ही प्रभारी कुलपति के पद की जिम्मेदारी दी जाती है। प्रो. केएस मिश्र 15 जनवरी को रिटायर होने जा रहे हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद किसी अन्य वरिष्ठ प्रोफेसर प्रोफेसर को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। लेकिन इससे पहले इविवि प्रशासन को शिक्षकों की वरिष्ठता सूची केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजनी होगी। मंत्रालय की ओर से अनुमति मिलने के बाद ही किसी अन्य प्रोफेसर को प्रभारी कुलपति की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।



हालांकि प्रभारी कुलपति के पास शिक्षक भर्ती का कोई आधिकार नहीं होना है। मंत्रालय इसके लिए विशेष तौर पर प्रभारी कुलपति को अधिकृत कर सकता है लेकिन इसकी कोई उम्मीद नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इस बीच स्थायी कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी का गठन किया जा सकता है, जिसमें एग्जीक्यूटिव कमेटी के दो सदस्य और भारत सरकार की ओर से नामित कोई एक सदस्य शामिल होगा।


यह कमेटी आवेदन आमंत्रित करेगी और आवेदनकर्ताओं में दस लोगों का नाम छांटकर इंटरव्यू लेगी। इसके बाद कमेटी तीन से चार लोगों का नाम मंत्रालय भेजेगी और फिर मंत्रालय की ओर से ओर से किसी एक नाम पर स्थायी रूप से मुहर लगाई जाएगी। यह प्रक्रिया काफी लंबी हो सकती है। ऐसे में इविवि में शिक्षक भर्ती को मंजूरी मिलने के बाद ही भर्ती को समय से शुरू कर पाना मुश्किल होगा।
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