इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति कार्यालय पर हंगामा करते छात्र। इस दौरान प्रो. रतन लाल हंगलू को बाहर निकालते सुरक्षाकर्मी--फाइल फोटो।
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कथा लेखिका भूमिका अश्क ने कहा, वाइस चांसलर प्रो.रतन हांगलू से मिलीं कश्मीर से जुड़ीं अहम जानकारियां
प्रयागराज। नीलाभ अश्क की पत्नी और कथा लेखिका भूमिका अश्क जिस नए उपन्यास की तैयारी में हैं, वह कश्मीर की पृष्ठभूमि पर केंद्रित है। इसमें कश्मीर के सुनहरे दिनों से लेकर वहां के मौजूदा हालात तक को बयां करने की कोशिश है। यह एक ऐसे कश्मीरी युवक की कहानी है जो दस भाई-बहनों वाला है। वह बहुत सुंदर, बहुत प्रतिभाशाली, बहुत अनुभवी और बहुत संघर्षो से आगे बढ़ा हुआ इंसान है। लेकिन, उसने जिस बहुत खूबसूरत कश्मीर को देखा था, आज उसकी दुर्गति को भी देख रहा है और इसीलिए बहुत दुखी है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में भूमिका ने उपन्यास लेखन से जुड़े अनुभवों को साझा किया। बकौल भूमिका, इस उपन्यास के तथ्यों और जमीनी हकीकत के लिए मुझे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू से काफी मदद मिली। दरअसल, बीते दिनों मीरा फाउंडेशन की ओर से मीरा स्मृति पुरस्कार समारोह में शामिल होने के दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर ही मेरा उनसे परिचय हुआ। औपचारिक मुलाकात के दौरान उन्होंने अश्क जी से अपने लगाव के बारे में बताया। यह भी कि उन्हें पिता जी की किताब ‘पत्थर अल पत्थर’ बहुत अच्छी लगी।
वहीं चर्चा के दौरान मैंने उनसे अपने उपन्यास की चर्चा करते हुए कहा था, आप कश्मीरी हैं, इसलिए आप मेरे उपन्यास के बारे में मुझे जानकारियां दे सकते हैं। फिर तो अश्क परिवार के पारिवारिक मित्र की हैसियत से जब उनका दिल्ली आना हुआ तो वह घर भी आए और कश्मीर से जुड़े मसलों पर चर्चा की। इस बारे में कई बार उनसे फोन पर भी बातचीत हुई। उन्होंने चालीस वर्षों तक वहां रहकर कश्मीर को करीब से देखा है। उनके अनुभवों से ही मुझे बदलते कश्मीर, वहां के प्राकृतिक सौंदर्य, कश्मीर की पृष्ठभूमि, वहां की रोजमर्रा की जिंदगी, वहां के शहरों, सड़कों के नाम आदि के बारे में काफी जानकारियां मिलीं। फिलहाल किताब का एक चैप्टर ‘जन्नत’ पूरा होना अभी बाकी है, पर किताब जल्द ही पाठकों तक पहुंचेगी।