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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा, वकीलों की मदद के लिए क्या कर रहे हैं अधिवक्ता संगठन, यूपी सरकार को भी जारी किया नोटिस

Thu, 09 Apr 2020 08:45 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, अवध बार एसोसिएशन, एडवोकेट्स एसोसिएशन को नोटिस जारी कर पूछा है कि अधिवक्ताओं और उनके पंजीकृत मुंशियों के कल्याण हेतु उन्होंने क्या योजनाएं शुरू की हैं । कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है कि एडवोकेट्स वेलफेयर फंड के तहत उन्होंने अधिवक्ता कल्याण के लिए क्या किया है।

कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए किए गए लॉकडाउन से वकीलों और मुंशियों के सामने पैदा हुई आर्थिक कठिनाई पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने जनहित याचिका कायम की है। 
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न्यायालय - फोटो : file photo
कोर्ट ने इन सभी पक्षकारों को अपना पक्ष ईमेल के माध्यम से 15 अप्रैल तक कोर्ट में दाखिल करने को कहा है तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपना पक्ष 15 अप्रैल को रखने के लिए का निर्देश दिया है। कोर्ट का कहना है कि अदालत के पास बहुत से वकीलों के प्रत्यावेदन और ऑनलाइन मैसेज आ रहे हैं। लॉकडाउन के कारण अदालतें बंद है और सिर्फ अति आवश्यक कार्य ही हो रहे हैं। ऐसे में वकीलों की आमदनी भी प्रभावित हुई है। मगर इस अदालत के पास ऐसा कोई फंड नहीं है, जिससे वकीलों के कल्याण के लिए कोई योजना चलाई जा सके। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ता कल्याण की योजनाएं चलाना बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश का वैधानिक दायित्व है। दोनों के एक्ट में इस बात का प्रावधान है कि वह अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए योजनाएं चलाएंगे। कोर्ट ने कहा कि उनको नहीं मालूम है कि अभी तक ऐसी कोई योजना शुरू की गई है या नहीं। इसके अलावा हर अदालत से संबद्ध बार एसोसिएशन हैं, उनकी भी जिम्मेदारी है कि वह अपने सदस्यों का ऐसे कठिन समय पर ध्यान रखें। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एडवोकेट वेलफेयर फंड स्थापित किया गया है जिसके पास अधिवक्ता कल्याण हेतु योजनाएं लागू करने की व्यापक शक्ति है।
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डेमो - फोटो : डेमो
फंड के ट्रस्टियों की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी योजनाएं लाएं, जिससे इस कठिन समय में अधिवक्ताओं और उनकी मुंशियों को राहत दी जा सके। अदालत का यह भी कहना था बहुत से ऐसे अधिवक्ता हैं, जिनकी वकालत बहुत अच्छी है। वह बार काउंसिल और बार एसोसिएशन को आर्थिक रूप से मदद दे सकते हैं। कोर्ट ने इन संगठनों से जानना चाहा है कि क्या उन्होंने जरूरतमंद वकीलों और मुंशियों की मदद के लिए अभी तक कोई योजना शुरू की है अथवा नहीं। इसकी जानकारी ईमेल के जरिये जवाब दाखिल कर 15 अप्रैल तक देने को कहा है। मामले की सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।
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