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कुंभ में ही बन गई थी भूमिका
यूं तो काले धान की पैदावार मुख्यत: मणिपुर में होती है, लेकिन अब चंदौली तथा आसपास के अन्य जिलों में भी इसकी पैदावार होने लगी है। कुंभ-2019 में कृषि विभाग की प्रदर्शनी में चंदौली का भी स्टाल था। वहां काले धान के बारे में भी जानकारी दी गई थी। त्रिभुवन ने बताया कि 300 रुपये प्रति किग्रा बीज मिल रहा था। प्रदर्शनी में बताया गया था कि इसके चावल की कीमत न्यूनतम 400 रुपये प्रति किग्रा है।
उनका कहना है कि इतना महंगा चावल खरीदकर तो नहीं खा सकते लेकिन पैदावार तो कर सकते हैं। इसी जज्बे से पिछले साल इसकी खेती का निर्णय लिया गया। यहां चाक आहरे प्रजाति की नर्सरी डाली गई। इसमें 50 और किसान जुड़ गए और छोटे-छोटे हिस्से में इसकी खेती शुरू की गई। इस वर्ष 50 हेक्टेयर में काले धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नर्सरी डाल दी गई है।