हाथरस के डीएल पब्लिक स्कूल के प्रबंधक दिनेश और उसके पिता जसोदन के सियासी रिश्ते भी बड़े मजबूत हैं। इतना ही नहीं जिले के अफसरों से भी तांत्रिक पिता और पुत्र गहरे संबंध रखते थे। इनके स्कूल में प्रबंधक के कार्यालय में कई बड़े नेताओं के साथ दिनेश के फोटो टंगे हैं। अफसरों का भी यहां आना जाना था। यही वजह है कि बगैर मान्यता के स्कूल चल रहा था। बच्चों की संख्या 250 से बढ़कर 7000 तक पहुंच गई है। लेकिन किसी ने भी इनसे मान्यता से जुड़े प्रपत्र नहीं मांगे। तुरसेन गांव निवासी जसोदन और उसके बेटे दिनेश ने मिलकर चार साल पहले स्कूल खोला था।
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Hathras Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
स्कूल की शुरूआत पांच कमरों से की गई थी। उस समय 250 बच्चे यहां पढ़ते थे। लेकिन धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई। जसोदन तंत्र-मंत्र का भी काम करता था। आसपास के गांव के लोग भी उसके पास आते जाते थे। इसी का फायदा दिनेश ने उठाया और जो बच्चे पहले सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे उन्हें भी अपने स्कूल में करा लिया। गांव के लोगों का कहना है कि कई पार्टियों के लोगों से इनके गहरे रिश्ते थे। जब भी स्कूल का कोई कार्यक्रम होता था तो उसके होर्डिंग और बैनर लगाए जाते थे।
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- फोटो : अमर उजाला
इन पर बड़े नेताओं के फोटो होते थे। अब जब स्कूल के हॉस्टल में छात्र कृतार्थ की हत्या हुई तो इनकी असलियत लोगों के सामने आई। गांव के लोगों का कहना है कि कोई विश्वास नहीं कर सकता कि यह दोनों ऐसा घिनौना कृत्य भी कर सकते हैं। बताया जाता है कि शिक्षा विभाग के अफसरों से भी इनकी अच्छी दोस्ती थी। यही वजह है कि यह लोग बगैर मान्यता के स्कूल चलाते रहे। एसपी निपुण अग्रवाल का कहना है कि अब तक की पड़ताल में जो भी मामले सामने आ रहे हैं सभी की जांच कराई जा रही है।
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राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग ने भी लिया घटना का संज्ञान, घटना को बताया भयानक
वहीं, छात्र कृतार्थ की हत्या में जेल गए प्रबंधक दिनेश बघेल पर बेसिक शिक्षा विभाग ने भी शिकंजा कस दिया है। खंड शिक्षा अधिकारी शुक्रवार को उस पर बिना मान्यता कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं और आवासीय विद्यालय चलाने, धोखाधड़ी व आरटीई के उल्लघंन सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। उधर, राष्ट्रीय बाल आयोग ने भी घटना का संज्ञान लिया है और आयोग की एक टीम हाथरस आएगी।
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बाल अधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूगो ने घटना को भयानक और अक्षम्य कृत्य बताया है। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध में राज्य बाल आयोग के अध्यक्ष से बात की है और आयोग की एक टीम जल्दी हाथरस भेजी जाएगी। आयोग बच्चों की सुरक्षा के संबंध में सरकार को सिफारिशें भी देगा। रसगवां स्थित डीएल पब्लिक स्कूल के बिना मान्यता आवासीय विद्यालय चलने का मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
खंड शिक्षा अधिकारी पूनम चौधरी ने रिपोर्ट में बताया है कि विद्यालय के पास केवल कक्षा एक से पांचवीं तक की मान्यता थी, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की अनुमति के बिना धोखाधड़ी से यहां एक से आठवीं तक की कक्षाओं और आवासीय विद्यालय का संचालन किया जा रहा था। उन्होंने शुक्रवार को विद्यालय का निरीक्षण किया तो वह बंद मिला। ग्राम प्रधान मुनेश देवी ने लिखित बयान में कहा है कि इस विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही थीं और विद्यालय आवासीय था।