अलीगढ़ के गोंडा थाने में विधायक व थानाध्यक्ष के बीच मारपीट प्रकरण के बाद गेंद अब शासन के पाले में है। आईजी की जांच रिपोर्ट शासन के पास चले जाने के बाद अब हर किसी को इस बात का इंतजार है कि आखिर इस मामले में गाज किस पर गिरेगी। शुक्रवार को शासन में आईजी की जांच आख्या पर दिन भर मंथन होता रहा। मगर देर शाम तक किसी तरह का निर्णय नहीं लिया जा सका।
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विधायक-एसओ प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
जिला स्तर पर भी निर्णय का इंतजार हो रहा है। शायद यही वजह है कि अभी तक गोंडा में 48 घंटे बीतने के बाद भी किसी नए थाना प्रभारी की तैनाती नहीं की गई है। गोंडा में थानाध्यक्ष अनुज सैनी व इगलास क्षेत्र के भाजपा विधायक राजकुमार सहयोगी के बीच बुधवार को हुई मारपीट के बाद मुख्यमंत्री ने रेंज के आईजी दीपक रतन से 24 घंटे में पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तलब की थी।
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भाजपा विधायक
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मुख्यमंत्री के आदेश पर आईजी ने बृहस्पतिवार को 24 घंटे बीतने से पहले ही अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी। कई पन्नों की रिपोर्ट की को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। इसके बाद जिला स्तर पर न तो पुलिस स्तर से इस विषय में कोई टिप्पणी सामने आई है और भाजपाई खेमा भी शांत बैठा हुआ है। हालांकि, जांच रिपोर्ट पहुंचने से पहले बृहस्पतिवार को विधायक राजकुमार सहयोगी की मुख्यमंत्री के सामने पेशी हो चुकी है।
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mla rajkumar shayogi
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इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि सीएम ने आईजी के जरिये पूरा प्रकरण तलब किया है, जबकि विधायक को बुलाकर उनसे उनका पूरा पक्ष सुना है। इसके बाद शुक्रवार को कोई निर्णय आने की उम्मीद थी। मगर ऐसा देर शाम तक नहीं हो सका। हालांकि शासन में शुक्रवार को इस रिपोर्ट पर मंथन हुआ। इस कारण दोनों पक्षों से जुड़े लोगों की निगाहें रिपोर्ट के आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। इसी बीच विधायक व एसओ के कई ऑडियो व वीडियो भी वायरल हुए हैं। वह भी विभिन्न माध्यमों से शासन तक पहुंचे हैं। ऐसे में विधायक पर भी पार्टी स्तर से किसी तरह के निर्णय के कयास लगाये जा रहे है।
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मारपीट के बाद थाने में भीड़
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शोर से बचने को मामला ठंडा होने के संकेत
सूत्र यह भी बता मामले में शासन स्तर से जल्द ही कोई निर्णय शायद नहीं दिया जाएगा। इसके पीछे दलील विपक्षी लामबंदी की है। संकेत हैं कि अगर विधायक को दोषी ठहराया गया तो विपक्ष हावी होगा और पुलिस को दोषी ठहराया गया तो विपक्ष शोर मचाएगा। कुल मिलाकर मंशा है कि प्रकरण को किसी तरह ठंडा होने दिया जाए। सभी पक्ष चुप्पी साधे रहें। इसके बाद धीरे से मामले में कोई निर्णय लेकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।