कहते हैं कि अनुभव बेहद काम आता है। हाथरस के चंदपा कांड में शुरुआत से अनुभव की कमी बड़ी गलतियों की ओर इशारा कर रही है। शुरुआत से हुआ कुप्रबंधन इस मुद्दे के तूल पकड़ने और मीडिया के चंदपा में डेरा डालने का बड़ा कारण बना है। जब यह बात शासन को समझ में आई तो एसपी से लेकर सीओ, कोतवाल, एसएसआई और थाने के हेड मुहर्रिर तक के निलंबन की कार्रवाई हुई। मगर, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मीडिया को तरह-तरह की टिप्पणी करने और सियासी दलों को रोटियां सेकने का मौका मिल चुका था। कहते हैं कि जब सांप निकल गया, तब लाठी पीटने से क्या फायदा?