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Hathras Rape Case: बिटिया के परिजन रुआंसे गले से बोले-कुछ तो समय दो भाई, बच्चों के लिए खाना बना लें, भूखे रो रहे हैं

Sun, 04 Oct 2020 09:47 AM IST
शाहरुख खान राजा तिवारी, अमर उजाला, हाथरस/अलीगढ़।
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Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
चंदपा की बिटिया के गांव में शनिवार को जब मीडिया कर्मियों को प्रवेश मिला तो दिल्ली, मुंबई, हरियाणा, एनसीआर और पंजाब तक के मीडियाकर्मी अंदर पहुंच गए। बिटिया के घेर से लेकर गली तक, उसके बाद आंगन से छत तक तकरीबन सौ से अधिक मीडिया कर्मी जमा थे। जहां से कई चैनलों का लाइव प्रोग्राम चल रहा था। 
 
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पीड़िता की रिश्तेदार - फोटो : अमर उजाला
सवाल-दर-सवाल से बिटिया के घर वाले परेशान हो चुके थे। इसके बाद डीजीपी और गृहसचिव आए तो फिर से सवाल-जवाब का लंबा दौर शुरू हो गया। मीडिया कर्मियों के सवालों से थक, हारकर बिटिया के घर की महिलाओं ने रुआंसे गले से कहा कि घर से खाना नहीं बना है। कुछ वक्त दो तो कम से कम बच्चों के लिए खाना बना दें। बच्चे भूखे हैं। वो रो रहे हैं। कब तक उनको बिस्किट के सहारे दिन कटवाएंगे। 

 
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हाथरस में पीड़िता के गांव में आज मीडिया को जाने की मिली अनुमति - फोटो : अमर उजाला
इस बीच एक रिश्तेदार महिला ने मीडिया कर्मियों से ठसे आंगन के किनारे बनी रसोई में रखा गैस का चूल्हा जलाया और सब्जी बनानी शुरू की। दूसरी महिला ने आटा गूंथा और रोटियां बनाने लगी। इस घर पर एक तरह से मीडिया का कब्जा हो चुका था, जिसके बाद घर वालों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया। घर वाले पहले पुलिस कर्मियों की संगीनों के साये में थे। थोड़ी छूट मिली तो सवालों से जूझना पड़ा। 
 

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पीड़िता के परिवार ने मीडिया से दूरी बनाते हुए खुद को कमरे में किया बंद - फोटो : अमर उजाला
बिटिया के घर वालों ने जब बात करने से मना कर दिया तो रिश्तेदार महिलाओं को घेरा गया। उनको बाहर घेरकर सवालों की झड़ी लगा दी गई। इधर, कुछ कैमरे आरोपी के घर की ओर घूम गए। वहां पहुंचे तो महिलाओं ने खूब सुनाया। उनकी बात कोई क्यों नहीं सुनता है..? उलटे सवालों पर कुछ मीडिया कर्मी शरमा गए। आरोपी के घर की महिलाओं की अगुवाई कर रहीं रामू की मां राजवती ने कहा कि उन्हें खुद शक है जो बिटिया बयान दे रही थी, बाइक पर अस्पताल पहुंच गई। 
 
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पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे अपर मुख्य सचिव और डीजीपी - फोटो : अमर उजाला
वो अचानक कैसे मर सकती है..? जरूर उसके साथ कुछ हुआ है, इसलिए सबकुछ छिपाया जा रहा है। बिटिया और पुलिस के लोगों ने साठगांठ कर निर्दोषों को फंसा दिया है। हमारे पक्ष की बात क्यों नहीं सुनी जा रही है। यहां की महिलाओं ने कहा कि अब पीड़ित पक्ष खुद का नार्को टेस्ट करवाने में क्यों पीछे हट रहा है..?अगर उसको वाकई में बिटिया के लिए इंसाफ चाहिए तो टेस्ट करने से क्या बचना।
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