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हाथरस कांड: अब तक का सबसे बड़ा खुलासा, डॉक्टरों ने 26 सितंबर को एम्स ले जाने का दिया था सुझाव, लेकिन...

Fri, 02 Oct 2020 08:52 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
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Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
कुछ सवाल ऐसे हैं, जो हाथरस के चंदपा की अनुसूचित जाति की बेटी की मौत से पहले इलाज में हुई लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं। इन लापरवाहियों के लिए जिम्मेदार या जवाबदेह कौन होगा? सबसे बड़ा सवाल है कि बेटी को टॉप क्लास सुविधाओं से युक्त एम्स रेफर किया गया था, मगर उसे एम्स ले जाने के बजाय सफदरजंग क्यों ले जाया गया? 
 
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Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
वहीं बेटी को तीन दिन पहले ही यहां से दिल्ली ले जाने का सुझाव मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दिया था, मगर उसे तीन दिन बाद लेकर जाया गया? इन सवालों का किसी स्तर से सही जवाब नहीं मिल रहा है। 14 सितंबर को हुई इस घटना के बाद बेटी को जेएन मेडिकल कॉलेज लाकर भरती कराया गया। दो दिन के इलाज के बाद उसे हालत नाजुक होने पर वेंटिलेटर पर लिया गया। 
 
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Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 26 सितंबर को बेटी को हायर सेंटर एम्स ले जाने का सुझाव मेडिकल कालेज के डॉक्टरों ने दिया। इस खबर पर हाथरस पुलिस के अधिकारियों से स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने वार्ता की। परिवार से बात हुई, मगर परिवार की ओर से यह कहकर सहमति नहीं दी गई कि वहां हम अकेले कैसे कर पाएंगे? उस समय एम्स के डॉक्टरों से बातचीत भी की गई। 
 

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Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
वहां से इशारा भी मिल गया कि इसे लेकर आ सकते हैं। इसके बाद अचानक 28 सितंबर की सुबह उसे एम्स रेफर किया गया। मगर एम्स के बजाय हाथरस जिला पुलिस उसे सफदरजंग लेकर पहुंच गई। वहां अगले 24 घंटे में ही उसने दम तोड़ दिया। हाथरस की बेटी के उपचार के मामले में जेएन मेडिकल कॉलेज के द्वारा उसको एम्स दिल्ली के लिए रेफर किया गया था। क्योंकि जेएनएमसी का हायर रेफरल सेंटर एम्स है। 
 
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Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
वह सफदरजंग कैसे पहुंची इस बात का जवाब हाथरस जिला प्रशासन दे सकेगा। जहां तक पीड़ित को रेफर किए जाने में लगे समय का सवाल है तो यह फैसला किसी भी मामले में प्रमुख तौर से परिजनों के द्वारा लिया जाता है। डॉक्टर परिजनों को परामर्श दे सकते हैं, लेकिन अंतिम तौर पर फैसला परिजनों को लेना होता है। बिना डॉक्टर के परामर्श दिए भी परिजन अपनी ओर से फैसला ले सकते हैं। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज से जारी मेडिकल रिपोर्ट केवल जांच अधिकारी को या अदालत में प्रस्तुत की जाती है। 
 
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Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
अन्य किसी तीसरी अथॉरिटी को यह रिपोर्ट नहीं दी जाती है। पीड़ित से दुष्कर्म होने का जहां तक सवाल है तो जिला प्रशासन में इसके लिए एक टीम गठित की थी। इस टीम में अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इस बनाई गई टीम में मेडिकल कॉलेज की कोई भी भूमिका नहीं है।- प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी प्रिंसिपल जेएन मेडिकल कॉलेज
 
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मौके पर जमा पुलिस - फोटो : अमर उजाला
जेएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से बेटी को सफदरजंग ले जाने के लिए रेफर किया था। हम अपनी मर्जी से लेकर नहीं गए। परिवार हमारे साथ था। पिता व भाई की सहमति से ही उसे वहां लेकर जाया गया। इलाज को लेकर हर कदम पर परिवार से सहमति ली गई थी। -प्रकाश कुमार, एएसपी, हाथरस
 
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