हाथरस बिटिया के प्रकरण में अभी भी इलाके में जातीय तनाव व्याप्त है। हालांकि पुलिस की सख्ती के चलते प्रदर्शन और पंचायतें नहीं हो पा रहीं हैं। पुलिस और खुफिया तंत्र इस पर पैनी निगाह रखे हुए है। इधर, इस तनाव के बीच सामान्य दिनचर्या पटरी पर लौट रही है। कई दिनों बाद अब लोग खेतों में काम करते हुए देखे जा सकते हैं।
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खेतों में काम करते दिखे किसान
- फोटो : अमर उजाला
14 सितंबर को बिटिया के साथ कथित रूप से दरिंदगी हुई थी। चारों आरोपी भी गिरफ्तार कर लिए गए। बिटिया की मौत के बाद इस मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। पूरे देश में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए। विपक्ष भाजपा सरकार पर इस घटना को लेकर हमलावर हो गया। इधर, भाजपा सरकार ने यह दावा किया कि इस घटना की आड़ में जातीय दंगा कराने की साजिश रची जा रही थी। इसे लेकर थाना चंदपा में मुकदमा भी दर्ज किया गया। थाना चंदपा में पीएफआई के चार एजेंट भी पकड़े गए।
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गांव में पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
अब तक इस प्रकरण में इस जिले में दर्जन भर से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इसमें कई बड़े राजनेता भी शामिल हैं। वहीं आरोपी पक्ष भी मुखर हुआ और उसने इस मामले को ऑनर किलिंग बताया। इस पूरे मामले को लेकर जातीय तनाव व्याप्त हो गया। बिटिया के गांव और आसपास के इलाके में यह तनाव अभी भी देखा जा सकता है।
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गांव में तैनात पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
तनाव के बीच इलाके में खामोशी भी पसरी हुई है। इसकी वजह पुलिस फोर्स की सख्ती है। पुलिस कहीं भी सभा, पंचायत और प्रदर्शन नहीं होने दे रही। वहीं सामान्य दिनचर्या भी पटरी पर लौट रही है। लोग अपने खेतों में काम कर रहे हैं और अपने रोजगार में जुटे हैं।
किसी ने नहीं कराई कोरोना की जांच
- फोटो : अमर उजाला
किसी ने नहीं कराई कोरोना की जांच
बिटिया के परिजनों ने कई बार कहने के बाद अभी तक कोरोना जांच नहीं कराई है। सोमवार को गांव के स्कूल में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक शिविर भी लगाया। वहां कुछ स्वास्थ्यकर्मी मौजूद भी रहे, लेकिन कोई भी व्यक्ति जांच कराने के लिए वहां नहीं आया। ऐसे में टीम हाथ पर हाथ रखे बैठी रही।