हाथरस की बिटिया के प्रकरण में मामले की जांच करने के लिए सीबीआई की एक टीम सोमवार को जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंची। यहां पर टीम ने आठ घंटे तक बिटिया के इलाज करने वाले संबंधित विभागों के आठ डॉक्टरों और दर्जन भर से अधिक स्टाफ के सदस्यों से पूछताछ की। इस दौरान टीम ने उपचार की डिटेल, दवाएं, मेडिकोलीगल का विवरण आदि सभी कुछ जुटाया। शाम सात बजे टीम मेडिकल कॉलेज से वापस चली गई।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सीबीआई की दो सदस्यीय टीम सोमवार को सुबह 11 बजे जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंची। सबसे पहले उन्होंने प्रिंसिपल आफिस का रुख किया। यहां कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद टीम मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के आफिस पहुंची। इस बीच संबंधित विभाग जैसे माइक्रोबायलोजी, स्त्री रोग विभाग, न्यूरोलोजी विभाग, इमरजेंसी, आईसीयू आदि के संबंधित डॉक्टरों स्टाफ को सूचित कर दिया गया कि वह पूछताछ के लिए आमंत्रित हों। मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक टीम ने हाथरस की बेटी के भर्ती होने से और उसको दिल्ली रेफर किए जाने तक के सभी दस्तावेज जुटाए हैं।
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सीबीआई की टीम
- फोटो : अमर उजाला
टीम ने पीड़िता की फोरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट सहित उपचार का विवरण बारीकी से जांचा और उसकी कापी अपने पास सुरक्षित की। बताया जाता है कि टीम ने सभी दवाओं के नाम और उपचार के दौरान दवाएं आदि दिए जाने का अंतराल भी नोट किया है। इसके साथ ही वह उपचार जो पीड़िता को दिया जा सकता था और संसाधनों के अभाव में नहीं मिल सका है, इसकी भी जानकारी की है। टीम ने उपचार के दौरान पीड़िता से मिलने कौन-कौन और कब-कब आया, इसका भी विवरण जुटाया है।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
साथ ही यह कि कितनी देर वह रुका, यह भी जानकारी की है। पीड़िता के साथ रात को कौन रुकता था, मेडिकल कॉलेज में लाने के बाद पहले सामान्य वार्ड में उसके बाद आईसीयू और उसके बाद दिल्ली रेफर किए जाने के पूरे क्रम की जानकारी की। यह भी कि दिन प्रतिदिन पीड़िता के स्वास्थ्य में किस तरह सुधार या गिरावट आनी शुरू हुई, यह भी विवरण जुटाया है। शाम को सात बजे टीम मेडिकल कॉलेज से वापस चली गई। संकेत हैं कि टीम एक बार फिर आ सकती है।
सीबीआई की टीम को जांच में सहयोग किया जा रहा है। यह मामला न्यायालय की निगरानी में है और जांच भी चल रही है इसलिए इस पर किसी तरह की टिप्पणी किया जाना संभव नहीं है - विश्वविद्यालय प्रवक्ता
सीबीआई की टीम मेडिकल कॉलेज आई थी। जो भी जानकारी उन्होंने मांगी, उपलब्ध कराई गई। उनकी जांच गोपनीय है और उनका अपना तरीका है। शाम को टीम वापस चली गई। -प्रो. वसीम अली, प्राक्टर, एएमयू