पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के निधन के बाद हाथरस की राजनीति ने एक कद्दावर नेता खो दिया है। हाथरस के राजनीतिक इतिहास में रामवीर उपाध्याय ही अकेले ऐसे राजनेता थे, जोकि लगातार 25 साल तक विधायक रहे और चार बार प्रदेश सरकार में महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री भी रहे। हाथरस में बसपा की राजनीति रामवीर उपाध्याय को खूब रास आई और सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला भी बसपा ने उनके दम पर हाथरस की राजनीति में आजमाया। सोशल इंजीनियरिंग के दम पर ही रामवीर ने पहले तीन चुनाव हाथरस विधानसभा सीट से जीते और उसके बाद जब यह सीट आरक्षित हो गई तो रामवीर ने वर्ष 2012 का चुनाव सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से ही सोशल इंजीनियरिंग के सहारे ही जीता। इसके बाद वर्ष 2017 में रामवीर को जाट बहुल सादाबाद विधानसभा क्षेत्र भी रास आया।
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रामवीर उपाध्याय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इस सीट पर भी रामवीर ने सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला लेकर पहली बार बसपा को विजय दिलाई। बसपा और रामवीर जब अलग-अलग हुए तो न जिले में बसपा पनपी और न ही रामवीर उपाध्याय जीत सके।
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रामवीर उपाध्याय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
रामवीर उपाध्याय को हाथरस को जिला बनाने का श्रेय भी मिला। वर्ष 1996 में जब रामवीर उपाध्याय पहली बार सरकार में मंत्री बने तो उन्होंने अपनी विधायकी और मंत्रिपद भी दांव पर लगा दिया और इसके चलते तीन मई 1997 को हाथरस जिला बना। रामवीर के दम पर उनके परिजन भी राजनीति में जमकर फले-फूले।
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रामवीर उपाध्याय और सीमा उपाध्याय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
राजेश भारद्वाज ने व्यक्त की संवेदना
भाजपा नेता राजेश भारद्वाज ने भी पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है। उनका कहना है कि वह पूर्व मंत्री को देखने बृहस्पतिवार को जाना चाह रहे थे, लेकिन उनके पीए ने बताया कि उनकी स्थिति नाजुक है, इसलिए वह उनसे मिलने नहीं जा सके।
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रामवीर उपाध्याय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का बीमारी से निधन
पूर्व मंत्री और भाजपा नेता रामवीर उपाध्याय का देर रात आगरा में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। रामवीर उपाध्याय के निधन से हाथरस और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। हाथरस की सियासत के पर्याय समझे जाने वाले रामवीर उपाध्याय आखिर मौत से हार गए। लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे उपाध्याय को आगरा स्थित आवास से देर रात हालत बिगड़ने पर आगरा के रेनबो अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
लगभग 64 वर्षीय रामवीर उपाध्याय मायावती की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। लगभग 25 साल तक हाथरस की विभिन्न विधानसभा सीटों से विधायक रहने वाले रामवीर उपाध्याय की गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय जिला पंचायत हाथरस की अध्यक्ष हैं। वह अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गए हैं। रामवीर उपाध्याय के भाई रामेश्वर ब्लॉक प्रमुख हैं। उनके एक और भाई मुकुल उपाध्याय पूर्व विधायक हैं।