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हाथरस: सिलिंडर फटने से मची अफरा-तफरी, दो किमी तक सुनाई दी धमाके की आवाज

Wed, 24 Feb 2021 10:35 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
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हाथरस में फटा सिलिंडर - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के गांव गंगचौली में गैस सिलिंडर इतनी तेज आवाज से फटा कि इसकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी। एकबारगी तो ग्रामीणों को कुछ समझ में ही नहीं आया, लेकिन जब ग्रामीणों ने मलबे में दबे बसंतलाल और उसके बच्चों की चीख-पुकार सुनी तो आनन-फानन उन्हें निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां भी देर रात तक कोहराम मचा रहा। मेहनत-मजदूरी करने वाले बसंतलाल का एक कमरे का मकान इस हादसे में मलबे में तब्दील हो गया। गांव का बसंतलाल मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का जीवन-यापन करता है। गांव में एक ही कमरे में वो और उसका पूरा परिवार रहता था। मंगलवार की देर शाम जब उसके घर में गैस सिलिंडर फटा तो मकान की छत फट गई गई और पूरा मकान मलबे में तब्दील हो गया। 
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हाथरस में फटा सिलिंडर - फोटो : अमर उजाला
उनके मकान के निकट ही एक और मकान की टिनशेड भी उड़ गई। निकट ही मौजूद कुछ ग्रामीणों ने उसके मकान की छत के ऊपर से एक आग का गोला जाता देखा। गांव के बाहर तक काफी तेज आवाज ग्रामीणों ने सुनी। 
 
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हाथरस में फटा सिलिंडर - फोटो : अमर उजाला
एकबारगी तो ग्रामीणों को यही समझ में आया कि आखिर हुआ क्या है, लेकिन जब ग्रामीणों ने मकान को ढहता देखा और बसंतलाल और उसके मासूम बच्चों की चीख-पुकार सुनी तो आनन-फानन ग्राम प्रधान गौरव प्रताप व अन्य ग्रामीणों ने इन्हें मलबे से निकलवाकर इसकी सूचना पुलिस व प्रशासन को दी। 

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हाथरस में फटा सिलिंडर - फोटो : अमर उजाला
गांव में एंबुलेंस पहुंची और इन घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। वहां इनका उपचार शुरू किया गया। वहीं काफी ग्रामीण भी अस्पताल पहुंच गए। जब बसंतलाल की पत्नी लता को मृत घोषित कर दिया गया तो वहां कोहराम मच गया। पुलिस भी वहां पहुंच गई। आग में झुलसे मासूम बच्चों को रोता बिलखता देख व उनकी मां की मौत की जानकारी पाकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। 
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हाथरस में फटा सिलिंडर - फोटो : अमर उजाला
घायल बच्चों को रेफर करने पर हुआ हंगामा
जिला अस्पताल में इस घटना के बाद स्थिति हंगामेदार हो गई। इसकी वजह यह थी कि अस्पताल से चिकित्सक इन बच्चों को रेफर कर रहे थे, जबकि ग्रामीणों का कहना था कि बच्चे की मां मर गई है और पिता घायल है। ऐसे में बच्चों का यहीं उपचार कराया जाए। इन्हें रेफर न किया जाए। इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक का कहना था कि यहां बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है और बच्चों की हालत बिगड़ सकती है।
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