ताजनगरी के 150 एमएलडी सीवर के ट्रीटमेंट के लिए चेन्नई की कंपनी वीए टेक वबाग को ढाई साल में 128 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं, लेकिन ताजमहल के पीछे यमुना नदी सबसे मैली है। यमुना में सबसे ज्यादा प्रदूषण दशहरा घाट पर है, जबकि महज एक किमी पहले मंटोला नाले की टैपिंग कर सीवर ट्रीटमेंट के दावे किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा यहां से लिए गए सैंपल में प्रदूषण की मात्रा सबसे खराब स्तर से भी 13 गुना ज्यादा पाई गई है।
यमुना नदी में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीन जगह कैलाश घाट, वाटरवर्क्स और ताजमहल पर सैंपल भरे थे, जिनमें सबसे खराब रिपोर्ट ताजमहल के पीछे की आई है। कैलाश घाट के मुकाबले ताज पर चार गुना और वाटरवर्क्स पर पानी की गुणवत्ता के मुकाबले ठीक दो गुना ज्यादा प्रदूषण पाया गया है। वह भी तब जब सीवेज पंपिंग स्टेशन और एसटीपी संचालन के लिए वबाग को हर साल 48 करोड़ रुपये का भुगतान हो रहा है। यूपीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक घटिया स्तर के पानी में 5 हजार कॉलीफार्म होने चाहिए, पर यहां इनकी मात्रा 63 हजार है। बीओडी की मात्रा दो और तीन के मुकाबले 10.4 पाई गई जो बेहद खराब है।