देश के पहले एक्सप्रेसवे पर रात में सफर अपने रिस्क पर करें। यहां न तो सुरक्षा के और न ही सुगम आवागमन के कोई संसाधन हैं। यदि कोई हादसा हो जाए तो आपके पास सिवाय चीखने-चिल्लाने के कुछ नहीं है। यमुना एक्सप्रेसवे पर लापरवाही का आलम यह है कि सोमवार तड़के जिस जगह हादसा हुआ, रात में उसके आसपास भी व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं था।
बस हादसे में 29 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद ‘अमर उजाला’ की टीम ने रात में यमुना एक्सप्रेसवे के लगभग 11 किमी क्षेत्र (खंदौली से कुबेरपुर तक) का जायजा लिया। इसमें ऐसी तमाम खामियां दिखीं, जिनकी वजह से हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। अगली स्लाइड्स में देखिए एक्सप्रेसवे पर रात में व्यवस्थाओं की स्थिति....
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यमुना एक्सप्रेसवे पर पोस्ट 158
- फोटो : अमर उजाला
पोस्ट: 158 (समय: रात 11:05 बजे)
इसके नीचे अंडरपास है। लगभग 20 फीट नीचे जमीन है। रात में वाहन चालकों को यहां सचेत करने के लिए सोलर लाइट लगाई गई थीं। लेकिन पिछले दो साल से खराब हैं। यहां सुरक्षाकर्मी केहरी सिंह तैनात है लेकिन रात में सिर्फ सोने के लिए आता है। उसका कहना है कि दो साल से लाइटें खराब हैं।
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पोस्ट 160 पर सो रहा सुरक्षाकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
पोस्ट: 160 (समय: रात लगभग 11:25 बजे)
इस अंडरपास के ऊपर भी सोलर पैनल लगा हुआ है। लेकिन ये खराब है। यहां तैनात सुरक्षाकर्मी ब्रजमोहन ने बताया कि 3 महीने से सोलर लाइटें खराब हैं। कई बार एक्सप्रेसवे के अधिकारियों को बताया लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं। वह सिर्फ यहां सोने आता है।
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पोस्ट 163 पर पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
पोस्ट: 163 (समय: रात लगभग 11.45 बजे)
सिक्सलेन एक्सप्रेसवे के दोनों ट्रैक के बीच में लगभग आठ फुट खाली जगह है। लगभग 18 फुट नीचे सर्विस लेन है। रेलिंग के बाद कोई रुकावट नहीं है। ऐसे में यहां संकेतक के लिए सोलर पैनल था लेकिन ये भी खराब पड़ा है। यहां कोई कर्मचारी भी तैनात नहीं है।
इस 11 किमी के दायरे में सिर्फ जहां हादसा हुआ, वहीं पर पुलिसकर्मी गश्त पर दिखे। इसके अलावा एक भी पुलिस की जीप नहीं दिखाई दी। लगभग एक घंटे के दौरान कोई गश्ती गाड़ी भी यहां से नहीं गुजरी। ऐसे में यदि कोई हादसा हो जाए तो न कोई देखने वाला है और न कोई सुनने वाला।