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विश्व नदी दिवस: सात नदियों का शहर आगरा, पानी के लिए 130 किमी दूर से आ रहे 'गंगाजल' पर निर्भर

Mon, 28 Sep 2020 12:26 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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ताजमहल के पार्श्व में बहती यमुनी नदी - फोटो : अमर उजाला
यमुना और चंबल समेत सात नदियां ताजनगरी से गुजरती हैं, लेकिन शहर पीने के पानी के लिए 130 किमी दूर बुलंदशहर के पालड़ा फॉल पर गंगा नदी पर निर्भर है। फैक्टरियों से निकले प्रदूषण, सीवर डालने और कचरा फेंकने से यमुना नदी गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है, जिसका पानी सिंचाई के काबिल भी नहीं रहा। वहीं खारी और उटंगन जैसी नदियों में पानी बारिश के चंद महीने भी नहीं रहता। विश्व नदी दिवस पर नदियों के संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय नदी आयोग की स्थापना कर नदियों को पुनर्जीवित और सदानीरा करने की मांग की है।
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सूखी पड़ी उटंगन नदी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह के मुताबिक आगरा में सात नदियों के होते हुए भी पानी का संरक्षण नहीं हो रहा है। वर्ष 1990 तक जिन नदियों में बाढ़ आती थी, वह नदियां पानी की कमी से सूख चुकी हैं। केवल छोटे-छोटे प्रयास करके इन नदियों को सदानीरा बनाया जा सकता है, लेकिन सरकार को सहयोग करना होगा। 
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बटेश्वर में यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला
यमुना नदी: नगला अकोस से प्रवेश कर बटेश्वर होते हुए इटावा की ओर निकलती है। 92 नालों में से 61 की गंदगी सीधे यमुना नदी में गिरता है। इन नालों से 216 एमएलडी सीवेज नदी को प्रदूषित कर चुका है।

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चंबल नदी - फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी: 1024 किमी लंबी चंबल केवल 33 किमी लंबाई में उत्तर प्रदेश में बहती है। बाह, पिनाहट होते हुए इटावा के पचनदा में यमुना में मिलती है, जिसके बाद यमुना में पानी दिखता है। चंबल डाल परियोजना से बाह में कृषि भूमि की सिंचाई होती है। 
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किवाड़ नदी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
किवाड़ नदी: तांतपुर-जगनेर में किवाड़ नदी सोनी खेरा से निकलकर 14 किमी राजस्थान-धौलपुर की डांग में बहने के बाद वापस आगरा में जगनेर के पास देवरी में प्रवेश करती हुई उटंगन नदी में मिलती है। बारिश के दिनों में छोटे से नाले के रूप में दिखती है।
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खारी नदी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
खारी नदी: फतेहपुर सीकरी के तेरहमोरी बांध से 90 किमी की दूरी तय करके मलपुरा, सैयां, इरादत नगर होते हुए बाह-फतेहाबाद रोड पर अरनौटा के पास उटंगन नदी में मिलती है। केवल बारिश में बांधों के पास पानी दिखता है। पूरे साल सूखी रहती है।

करबन नदी
बुलंदशहर की खुर्जा तहसील से अलीगढ़, हाथरस होते हुए आगरा की एत्मादपुर तहसील में झरना नाला के नाम से यमुना नदी में गिरती है। केवल बरसात के दिनों में इसमें पानी दिखता है। अलीगढ़ व हाथरस के कारखानों का दूषित जल इसमें गिरता है। 
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उटंगन नदी - फोटो : अमर उजाला
उटंगन नदी: राजस्थान में गंभीर नदी, आगरा में उटंगन के नाम से चर्चित है। करौली के पास हिंडौन की अरावली की पहाड़ियों से बहती हुई आगरा में खेरागढ़ व फतेहाबाद होते हुए यमुना में मिलती है। 

बाणगंगा/उटंगन नदी
धौलपुर रेलमार्ग राजस्थान सीमा पर बाणगंगा नदी का बोर्ड लगा है। यूपी में सरकारी दस्तावेजों में यह उटंगन नदी है। जयपुर की बैराठ पहाड़ियों से दौसा, भरतपुर जिले के रूपवास से होकर जिले में सैंया, खेडिया से फतेहाबाद में यमुना में मिलती है।

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ताजमहल के पार्श्व में बहती यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला
नदियां सूखी तो गिर गया भूगर्भ जलस्तर
- डॉ. केपी सिंह के मुताबिक जैतपुर व पिनाहट ब्लाक को छोड़ जिले के 13 ब्लाक डार्क अथवा क्रिटिकल जोन में है। भूगर्भीय जलस्तर तीसरे स्ट्रेटा (90-150 मीटर) पर पहुंच गया है। कृषि भूमि की उर्वरकता पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर योजना बनाकर 
- नदियों की संख्या व दुर्दशा पर श्वेतपत्र पत्र जारी किया जाए

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चंबल नदी - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय नदी आयोग बने
- राष्ट्रीय नदी आयोग स्थापित कर नदियों का संरक्षण किया जाए
- जिले के 3687 में से केवल 166 तालाबों तक ही नहरों का पानी पहुंच रहा है
- गांवों में मनरेगा से नदियों का पुनरुद्धार किया जाए
- नदी किनारे घास, मूंज व पौधरोपण कर मिट्टी कटान रोकें
- शहरों में सीवर व कारखानों के पानी को शोधन कर डालें
- राजस्थान, मध्यप्रदेश की नदियों से यूपी की नदियों को जोड़ें
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सिकंदरा स्थित वाटर वर्क्स में गंगाजल (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
छोटे प्रयास से ही दूर हो जाएगी पानी की समस्या
जलाधिकार फाउंडेशन के राजीव सक्सेना ने कहा कि आगरा में सात नदियां हैं जिनके पानी से पूरे जिले की पेयजल समस्या को दूर किया जा सकता है। केवल छोटे-छोटे प्रयास करने हैं। न केवल पेयजल संकट बल्कि खेती और भूगर्भ जलस्तर में भी सुधार होगा।
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