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विश्व संग्रहालय दिवस: नौ माह पहले बदला मुगल म्यूजियम का नाम, काम अब भी अधूरा, पढ़िए पूरी खबर

Tue, 18 May 2021 12:32 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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शिवाजी के नाम से होगा आगरा का म्यूजियम - फोटो : अमर उजाला
ताजमहल पूर्वी गेट पर राज्य सरकार ने स्टेट आफ द आर्ट मुगल म्यूजियम का निर्माण जनवरी 2016 में शुरू कराया, लेकिन तय समय सीमा दिसंबर 2017 से चार साल बाद भी म्यूजियम का निर्माण पूरा नहीं हो सका। 172 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे मुगल म्यूजियम का नाम 16 सितंबर 2020 को राज्य सरकार ने बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम कर दिया, तब इसका बजट आवंटन कर निर्माण पूरा होने की उम्मीद बंधी, लेकिन अब भी निर्माण कार्य अधूरा है। 15 माह से म्यूजियम का काम बंद पड़ा है। इसका निर्माण करने वाली कंपनी टाटा प्रोजेक्टस 15 माह से बजट आवंटन न होने के कारण काम बंद कर चुकी है। ताजगंज स्थित विद्युत विभाग की पोल फैक्टरी की छह एकड़ जमीन पर बनाए जा रहे मुगल म्यूजियम का नाम योगी सरकार ने बदलकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम रख दिया, लेकिन इससे इसकी किस्मत में कोई बदलाव नहीं आया।
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म्यूजियम की निर्माणाधीन इमारत - फोटो : अमर उजाला
दरअसल,  172 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर प्रदेश सरकार ने केवल 94 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जबकि 78 करोड़ रुपये चाहिए। इस बार पांच करोड़ रुपये प्रदेश सरकार ने आवंटन किया है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान भी इसका काम ठप पड़ा है। 
 
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुगल म्यूजियम का नाम बदला - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार रखे हुए है उपेक्षा का भाव
छत्रपति शिवाजी म्यूजियम नाम रखने से उम्मीद थी कि काम जल्दी पूरा होगा, लेकिन नाम बदलने के बाद भी कोई काम नहीं हुआ। प्रदेश सरकार आगरा के प्रति उपेक्षा का भाव रखे हुए है। - राजीव सक्सेना, उपाध्यक्ष, टूरिज्म गिल्ड

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शिवाजी के नाम से होगी आगरा का म्यूजियम - फोटो : अमर उजाला
चार साल हो गए पर काम पूरा नहीं हुआ
वर्ल्ड क्लास म्यूजियम बनाने का दावा किया था, पर चार साल हो गए, अब तक पूरा नहीं हुआ। पर्यटन के इतने बुरे दौर में अगर म्यूजियम पूरा हो जाता तो एक आकर्षण बढ़ता। पर प्रदेश सरकार इसे लेकर संजीदा नहीं दिखती। -राकेश चौहान, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन
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ताजमहल में पर्यटक - फोटो : अमर उजाला
ताज, सीकरी और पालीवाल पार्क में हैं म्यूजियम
शहर में ताजमहल, फतेहपुर सीकरी में एएसआई और पालीवाल पार्क में नगर निगम द्वारा म्यूजियम चलाया जा रहा है। इसमें ताजमहल का म्यूजियम लॉर्ड कर्जन के समय वर्ष 1906 में शुरू हुआ था। यह सबसे पुराना म्यूजियम है, जिसे तब ताजमहल में रॉयल गेट के बाएं भाग के भवन में शुरू किया गया था। वर्ष 1982 में इसे ताज के पश्चिमी नौबतखाना में शिफ्ट कर दिया गया। इसकी तीन गैलरियों में ताज के मूल नक्शे, शाहजहां-मुमताज के हाथी दांत पर बने चित्र, पुराने हथियार, पेंटिंग्स, ताज की पच्चीकारी व नक्काशी में इस्तेमाल किए गए विभिन्न देशों से मंगाए गए पत्थरों की जानकारी, बर्तन, शाही फरमान, सोने व चांदी के मुगलकालीन सिक्के प्रदर्शित हैं। इनमें चीनी मिट्टी की बनी रकाबी भी है। फतेहपुर सीकरी में उत्खनन में निकली प्रतिमाएं हैं तो जोंस म्यूजियम में आजादी से जुड़े दस्तावेज और क्वीन विक्टोरिया की प्रतिमाएं रखी हुई हैं। 
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फतेहपुर सीकरी
एडीए उपाध्यक्ष ने देखीं नवरत्नों की मूर्तियां 
एडीए उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने सोमवार को फतेहपुर सीकरी स्थित दीवान ए आम की पार्किंग एवं गुलिस्ता पार्क में सम्राट अकबर के दरबार के नवरत्नों की मूर्तियों का निरीक्षण किया। गुलिस्तां पार्क में यह मूर्तियां पूर्व कमिश्नर प्रदीप भटनागर के कार्यकाल में तैयार कराई गई थीं। डॉ. पैंसिया ने गुलिस्तां पार्क की सफाई और रंगाई पुताई के लिए एएसआई से आग्रह करने के लिए कहा है।। उन्होंने पर्यटकों की सुविधा के लिए दीवान ए आम और गुलिस्तां पार्क में अत्याधुनिक शौचालय बनाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के समय मुख्य अभियंता, अधिशासी अभियंता आदि मौजूद रहे।
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