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World Heritage Week: 20 साल में लाडली बेगम के मकबरे का मिट गया वजूद

Sat, 21 Nov 2020 01:03 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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मऊ रोड पर था स्मारक, अब बचा है बोर्ड - फोटो : अमर उजाला
आगरा में मऊ रोड पर कभी लाडली बेगम का मकबरा हुआ करता था, लेकिन आज इसकी जगह सिर्फ एएसआई का बोर्ड बचा है। इस पर लिखा है संरक्षित स्मारक क्षेत्र लेकिन स्मारक बचा ही नहीं है। न कब्र है और न ही इमारत। इसके आसपास कब्जे हो गए। मकबरे की ईंट और पत्थर लोग उखाड़ ले गए। 20 सालों में मकबरे का वजूद मिट गया। लाडली बेगम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के नवरत्न अबुल फजल और फैजी की बहन थी।
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मऊ रोड स्थित स्मारक जहां लोगों ने बना दिया पार्क - फोटो : अमर उजाला
मकबरे का बोर्ड खंदारी के सिद्धार्थ एन्क्लेव के पार्क में लगा है। विश्व धरोहर सप्ताह में एएसआई भावी पीढ़ी को स्मारकों को सहेजने का संदेश दे रही है, लेकिन लाडली बेगम मकबरे को बचाने की कवायद तक नहीं की जा रही। इतिहास के पन्नों में दर्ज ताजमहल से पहले की मुगलिया धरोहर जमींदोज हो चुकी है। एएसआई आगरा सर्किल के संरक्षित स्मारकों में 59वें क्रमांक पर मौजूद लाडली बेगम का मकबरा कभी लाडली बेगम का बाग के नाम से मशहूर था।
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मऊ रोड पर था स्मारक, एएसआई का लगा बोर्ड - फोटो : अमर उजाला
अबुल फजल ने बनवाया था मकबरा
मुगलिया दौर के शिक्षक शेख मुबारक की बेटी लाडली बेगम अकबर के नवरत्न रहे अबुल फजल और फैजी की बहन थीं। उनकी शादी शेख सलीम चिश्ती के पोते इस्लाम खान से हुई थी। लाडली बेगम का बाग 1595 में अबुल फजल ने बनवाया था। 335 फीट लंबी 4 फीट मोटी दीवारों से घिरे इस बाग के चारों कोनों पर मीनारें थीं। 1608 में लाडली बेगम की मृत्यु के बाद उन्हें यहीं दफनाया गया। 
 

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विश्व धरोधर सप्ताह में सिकंदरा पर आए सैलानी - फोटो : अमर उजाला
मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद्र को अंग्रेजों ने इस मकबरे को बेच दिया था। जिन्होंने इसके पत्थर निकालकर बेच दिए और एक छतरी का निर्माण कराया। 1874 के बाद एएसआई ने इसे संरक्षित श्रेणी में रखा।
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प्रदर्शनी में आगरा का इतिहास देखते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
.. तो आज स्मारक मौजूद होता
20-30 साल पहले तक मैंने लाडली बेगम के मकबरे को देखा था, तब नीचे पत्थरों के ढेर, अवशेष थे। अगर एएसआई बोर्ड लगाने के बाद वाकई संरक्षण करता तो यह इमारत आज मौजूद होती। - राज किशोर शर्मा राजे, इतिहासकार
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