मुगल काल की स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूनों में शुमार अकबर टूम (सिकंदरा) उपेक्षा का शिकार है। नतीजा यह है कि इतिहास को समेटे स्मारक के कई हिस्से जमींदोज होते जा रहे हैं। स्मारक का उत्तरी गेट इसका उदाहरण है। संरक्षण के अभाव में इस विशाल गेट का अधिकांश भाग ढह गया है। 70 साल से उत्तरी गेट का संरक्षण नहीं हुआ है।
विज्ञापन
2 of 7
अकबर टूम
- फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी में विश्वदाय स्मारक ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी ही नहीं हैं, दर्जनों ऐसी इमारतें हैं जो इस शहर के वैभवशाली इतिहास की गवाह हैं। अकबर टूम इन्हीं में से एक है। स्मारक में समय-समय पर संरक्षण कार्य तो हुए लेकिन जितनी जरूरत थी उससे बहुत कम।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों की मानें तो इसके उत्तरी गेट का संरक्षण कार्य पिछले 70 साल से नहीं हुआ। हालांकि 10 साल पहले इसकी मरम्मत के लिए मशक्कत हुई थी। 40 लाख रुपये का प्रस्ताव पास किया गया, सामान भी आ गया था लेकिन कार्य शुरू नहीं हो सका। इस गेट तक पहुंचने के लिए आधे रास्ते तक पाथवे निर्माण का काम जरूर वर्ष 2010 में हुआ था।
4 of 7
अकबर टाम्ब
- फोटो : अमर उजाला
इतिहास: अकबर टूम आगरा-मथुरा हाईवे पर स्थित है। इतिहासकार इसका निर्माता अकबर को मानते हैं। कुछ भाग अकबर की मृत्यु के बाद उसके पुत्र जहांगीर द्वारा बनवाया गया।
विज्ञापन
5 of 7
एत्मादउद्दौला स्मारक, पांच साल से टूटी पड़ी हैं जालियां
- फोटो : अमर उजाला
यमुनापार स्थित एत्मादउद्दौला स्मारक भी रखरखाव के अभाव में बदहाल होता जा रहा है। मुख्य प्रवेश द्वार और स्मारक के पत्थर कई जगह से निकल गए हैं। जालियां भी टूट गई हैं। बताया जा रहा है कि सफेद और लाल पत्थर की जालियां पिछले पांच साल से टूटी हुई हैं। इन्हें अब तक नहीं लगाया गया। कई जगह से पत्थर भी टूट गए हैं।
विज्ञापन
6 of 7
चीनी का रोजा एत्मादउद्दौला
- फोटो : अमर उजाला
इतिहास: श्वेत संगमरमर से निर्मित यमुनापार बनी यह इमारत भव्य है। इसका निर्माण नूरजहां द्वारा अपने पिता मिर्जा ग्यास बेस की कब्र पर करवाया गया था। मिर्जा ग्यास बेग को एत्मादउद्दौला की उपाधि प्राप्त थी।
स्मारकों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। समय का असर इन पर दिखने लगा है। इनके पत्थर गलने लगे हैं। इसलिए अब इनके संरक्षण पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। -शमशुद्दीन, अध्यक्ष, एप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन