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Firozabad: प्राइमरी स्कूल की खाली जमीन को बना दिया बगिया, पर्यावरण को लेकर शिक्षक की नेक पहल की देखें ये खास तस्वीरें

Mon, 06 Jun 2022 08:07 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

प्राइमरी स्कूल किठौत की हरियाली देख हर कोई हैरत में है। स्कूल में गुलाब, गेंदा सहित अन्य पौधों की पहचान बच्चों के नाम से हैं।
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primary school - फोटो : अमर उजाला
इच्छा शक्ति व खुद पर भरोसा हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिले के अरांव ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल किठौत के प्रधानाध्यापक मोहम्मद शाहिद ने। करीब 11 साल पहले स्कूल की भूमि पर खर-पतवार थे। अब इस भूमि पर फलदार पेड़ों के साथ ही फूलों के पौधे लगे हैं। चंदन की भी खुशबू बिखर रही है। इसकी रखवाली यहां के बच्चे करते हैं। यहां की हरियाली देखकर राष्ट्रीय पक्षी मोर, सोना पतारी, जलमुर्गी और कोयल ने भी यहां आशियाना बना लिया है। अरांव ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल किठौत में मोहम्मद शाहिद को 2011 में ज्वाइनिंग मिली थी। तब स्कूल की खाली भूमि पर खरपतवार थे। शाहिद ने बताया कि वह बचपन से ही पर्यावरण प्रेमी रहे हैं। वह अपने जन्मदिन पर भी पेड़-पौधे ही लगाते हैं। स्कूल समय के बाद रोजाना डेढ़ से दो घंटे तक खुद कच्ची जमीन पर मेहनत कर 200 से अधिक पेड़ पौधे लगाए। जहां पक्की जमीन थी, वहां के लिए 110 गमले खरीदकर पौधे लगाए। 
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प्राइमरी स्कूल किठौत - फोटो : अमर उजाला
विद्यालय में औषधि वाटिका बनी है। इस वाटिका में बकायन, बालमखीरा, सुदर्शन, अर्जुन, सहजन सहित अन्य औषधि पौधे लगे हैं। स्कूल परिसर में आम, केला, शहतूत और नींबू के फलदार वृक्ष हैं। जो सीजन पर फल देते हैं। 
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प्राइमरी स्कूल किठौत - फोटो : अमर उजाला
बच्चों को मध्याह्न भोजन में केमिकल युक्त सब्जी न मिले, इसके लिए  टमाटर, बैंगन, धनिया, पालक आदि सब्जियां भी उगा रहे हैं। लहसुन और प्याज भी उगाया जाता है। यहां चार फुट ऊंचा चंदन का पेड़ भी लगा है। गेंदा, गुलाब, चांदनी, मोगरा आदि के फूल विद्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं। 

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 प्राइमरी स्कूल किठौत - फोटो : अमर उजाला
पक्षियों के लिए जगह-जगह घोंसले बनाकर पानी के लिए मिट्टी के बर्तन रखे हैं। शाहिद ने बताया कि विद्यालय में फल, सब्जी सीजन के अनुसार उगाते हैं। इसका प्रयोग एमडीएम के लिए किया जाता है।  गर्मी की छुट्टी हो या फिर बारिश हो। वह अपने हाथों से तैयार की इस बगिया को सहेजने और पक्षियों के दाना-पानी की व्यवस्था करने के लिए प्रतिदिन 14 किलोमीटर का रास्ता तय करते हैं।
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प्राइमरी स्कूल किठौत - फोटो : अमर उजाला

यहां बच्चों के नाम से है पौधों की पहचान 

स्कूल में गुलाब, गेंदा सहित अन्य पौधों की पहचान बच्चों के नाम से हैं। बच्चों में रुचि बढ़े और पौधों की देखभाल करें। इसलिए प्रत्येक बच्चे को पौधों की जिम्मेदारी दी गई है। इससे बच्चे पौधे की देखभाल करते हैं और पौधे टूटने से भी बच जाते हैं।
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