ताजनगरी के दिव्यांगों ने देश और दुनिया में सफलता का परचम लहराकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इनका जज्बा ऐसा है कि विकलांगता को कभी मंजिल के रास्ते में आने ही नहीं दिया। जो ठान लिया, उसके करके ही माने। खेल की दुनिया में इन्होंने ढेरों पदक जीते हैं। विश्व विकलांगता दिवस के अवसर पर इन हुनरमंदों ने अपनी कामयाबी की कहानी अमर उजाला से साझा की। अगली स्लाइड्स में पढ़िए इनके जज्बे की कहानी....
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निशानेबाज सोनिया शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
निशानेबाज सोनिया शर्मा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में देश का नाम रोशन कर रही हैं। दिव्यांगता को दरकिनार करते हुए बैंकॉक में 2017 में हुई पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था। 2018 में दक्षिण कोरिया में हुई पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप और 2018 में ही फ्रांस में हुई पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। 2017 में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सोनिया ने सिल्वर मेडल जीतकर शहर का नाम रोशन किया था।
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निशानेबाज सोनिया शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
हौसला हो तो मंजिल मिल ही जाती है
सोनिया ने अपनी कामयाबी का मंत्र पक्के इरादे को बताया। उनका कहना है कि अगर हौसला हो तो मंजिल मिल ही जाती है। विकलांगता कोई बाधा नहीं है। जीवन में हर किसी के जीवन में कोई न कोई परेशानी कभी न कभी आती ही है, अब यह इंसान पर है कि वह उससे घबरा जाए या फिर हौसले से उसको हरा दे। मेरा इरादा पक्का था, कामयाबी मिल गई।
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व्हील चेयर फेंसिंग में नेशनल चैंपियनशिप विजेता देवेंद्र कुमार
- फोटो : अमर उजाला
जोश : एक प्रतियोगिता जीतते ही दूसरी की तैयारी
2016-17 में व्हील चेयर फेंसिंग में नेशनल चैंपियनशिप जीतने वाले देवेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने कभी यह सोचा ही नहीं कि वह दिव्यांग है तो खेल में आगे नहीं बढ़ पाएगा। चुनौतियां बहुत आईं, अपने परिचित कुछ लोग कहते थे कि कोई ऐसा काम ढूंढे जिसमें दो पैसे मिलें लेकिन किसी की सुनी नहीं। 2017-18 में एक बार फिर नेशनल व्हील चेयर फेंसिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उन्होंने बताया कि वह एक प्रतियोगिता जीतते ही दूसरी की तैयारी शुरू कर देते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीतने पर उन्हें भारतीय टीम की ओर से 2017 इटली वर्ल्ड कप व्हील चेयर फेंसिंग चैंपियनशिप और सन 2018 में इंडोनेशिया में हुए पैरा एशियन गेम्स में खेलने का अवसर मिला।
जुनून : चुभ गया था बेचारा शब्द, कुछ करने की ठानी
नामनेर निवासी पंडित मनीष शर्मा भजन गाते हैं, कथा भी सुनाते हैं। उन्होंने बताया कि जब वह 15 साल के तब मोहल्ले के कुछ बच्चों ने उनकी विकलांगता देख उन्हें बेचारा कहा। यह शब्द उन्हें चुभ गया। उन्होंने कुछ करने की ठानी। प्रभु ने उन्हें सुरीला गला दिया है, इसलिए भजन गाने लगे। देश के कई राज्यों के साथ ही दक्षिण अफ्रीका और सिंगापुर में पांच हजार से अधिक साईं संध्या कर चुके हैं।