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सीएए के विरोध में शहीद स्मारक पर नारेबाजी, 'नागरिकता कानून से चाहिए आजादी...लेकर रहेंगे आजादी'

Mon, 20 Jan 2020 12:05 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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शहीद स्मारक में सीएए के विरोध में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
शहर के अलग-अलग मोहल्लों से हाथों में तिरंगा लेकर जुटीं महिलाओं ने नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में शहीद स्मारक पर पौन घंटे तक नारेबाजी की। खुफिया पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। बाद में हरीपर्वत थाना पुलिस पहुंची और प्रदर्शनकारियों की हौसला अफजाई कर रहे कांग्रेसियों में से दो युवकों को थाने ले गई। प्रदर्शनकारी थाना पहुंचे तो उन्हें छोड़ दिया गया।
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नो एनपीए, नो सीएए’ लिखीं तख्तियां लेकर प्रदर्शन करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनकारियों ने ‘नो एनपीए, नो सीएए’ लिखीं तख्तियां ले रखी थीं। वे नारे लगा रही थीं, नागरिकता कानून से चाहिए आजादी .. लेकर रहेंगे आजादी। इसकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने कहा कि धारा -144 लगी है, बगैर अनुमति प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। इस पर महिलाओं ने तिरंगे झंडे लहराना शुरू कर दिया। दो से तीन बजे तक यह प्रदर्शन चला। 
 
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शहीद स्मारक पर प्रदर्शन करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
आलमगंज, लोहामंडी, बेसन की बस्ती, सदर भट्ठी और नई बस्ती की 24-25 महिलाएं व युवतियां दोपहर दो बजे पहुंची थीं। इनका नेतृत्व फिजी नाम की युवती कर रही थी। प्रदर्शन के दरम्यान कांग्रेस की प्रदेश महासचिव शबाना खंडेलवाल, एनएसयूआई के बिलाल अहमद व बुरहान शम्सी, नवीन आंबेडकर भी पहुंच गए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की हौसलाअफजाई शुरू कर दी। हरीपर्वत थाने की पुलिस ने यहां से बुरहान और नवीन को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बगैर अनुमति प्रदर्शन करने पर प्रदर्शनकारियों को फटकार लगाई।

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प्रदर्शन करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करने वाली महिला फिजी ने कहा कि सीएए, कैब जैसे कानून देश की एकता के लिए खतरा हैं। उनका कोई नेता नहीं है और न ही किसी ने उन्हें यहां भेजा है। वह अपनी मर्जी से प्रदर्शन करने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में पुलिसकर्मियों ने उनके साथ खींचतान की और धमकाया।
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हरीपर्वत पुलिस स्टेशन आगरा
कांग्रेस की प्रदेश महासचिव शबाना खंडेलवाल ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं सीएए को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध व्यक्त कर रही थीं। यह संवैधानिक अधिकार है। पुलिस ने यहां पहुंचकर महिलाओं को धमकाया और भगा दिया। दो लोगों को भी पकड़कर ले गई। यह अलोकतांत्रिक कदम है।
प्रदर्शन की जानकारी पर पुलिस पहुंची थी, दो युवकों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था, उन्हें बाद में छोड़ दिया गया। - अजय कौशल, थाना प्रभारी निरीक्षक, हरीपर्वत
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