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'कैद' में 2000 मौतों का राज: एसएसपी ने मांगा रिकॉर्ड, तत्काल होगा विसरा परीक्षण

Mon, 02 Dec 2019 12:46 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
एसएसपी बबलू कुमार 1990 से अब तक के विसरा का रिकॉर्ड अपने ही ऑफिस से स्टाफ से तलब किया है। निर्देश दिए हैं कि हर साल का महीने वार ब्योरा तैयार कर उनके सामने रखा जाएगा। एसएसपी का कहना है कि सीएमओ से भी जानकारी की जाएगी। जिन विसरा के परीक्षण की जरूरत है, उनका कराया जाएगा। जिनका परीक्षण नहीं होना है, उनका निस्तारण करा दिया जाएगा। इसके लिए एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद को निर्देश दिए गए हैं।
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पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला ने यह खुलासा किया था कि एसएन मेडिकल कॉलेज की पुरानी पोस्टमार्टम हाउस बिल्डिंग के एक जर्जर कमरे में वर्ष 1990 से 2004 तक के 2000 विसरा रखे हैं। कई जार गल गए हैं, इनमें रखे विसरा खराब हो गए हैं। इस पर शुक्रवार को सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स जर्जर कमरे का निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। उन्होंने व्यवस्था ठीक कराने की बात कही। साथ ही एसएसपी को पत्र लिखकर कहा कि विसरा का परीक्षण कराया जाए।
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एसएसपी बबलू कुमार - फोटो : अमर उजाला
शनिवार को एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने दफ्तर के स्टाफ से विसरा का पुराना रिकॉर्ड निकलवाया है। इसके अध्ययन केबाद सीएमओ से जानकारी की जाएगी। जिन मामलों में एफआईआर दर्ज मिलेगी, उनमें विसरा परीक्षण तुरंत कराया जाएगा।
 

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बोत्रे, रोहन प्रमोद, एसपी सिटी - फोटो : अमर उजाला
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद का कहना है कि इस मामले में जल्द ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों से बात की है। उनसे पूछा जाएगा कि इतने पुराने विसरा का परीक्षण हो सकता है या नहीं? जिनके परीक्षण की जरूरत नहीं है, उनके निस्तारण के बारे में भी राय ली जाएगी।
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आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला - फोटो : अमर उजाला
विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डॉ. एके मित्तल का कहना है कि अगर विसरा को ठीक ढंग से रखा गया है, तो उसका परीक्षण मुमकिन है। इसमें जहर का पता लगाया जा सकता है। हालांकि अल्कोहल का पता अब नहीं चलेगा। साथ ही यह देखना भी जरूरी है कि परीक्षण उसी दशा में कराया जाता है जब विसरा के साथ एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी पुलिस भेजती है।
 
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पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
विसरा संरक्षित करने की विधि दो साल पहले बदल दी गई थी। पहले विसरा जार में संरक्षित किए जाते थे। इसमें लिवर, किडनी, अमाशय, प्लीहा, आंत आदि अंग रखे जाते थे। अब विसरा वॉइल में लिया जाता है। पूरे अंग नहीं, उनके कुछ हिस्से और तरल पदार्थ संरक्षित किए जाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Flickr
इसी साल 20 जुलाई को न्यू आगरा के करबला, नई आबादी के युवक राजा को उसके दोस्त एसएन इमरजेंसी में छोड़ गए थे। उसकी तबीयत बिगड़ी थी। उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस पता नहीं कर पाई कि वह कैसे मरा? राजा की मां शहनाज और बहन रानी ने बताया कि हमने राजा के तीन दोस्तों पर शक जाहिर किया था, वे ही उसे बुलाकर ले गए थे। पुलिस ने तीनों से पूछताछ की लेकिन छोड़ दिया। कहा कि जब हत्या होने का साक्ष्य नहीं है तो इन्हें गिरफ्तार कैसे करें। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं था। विसरा संरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट 20 अगस्त को आई। पता चला कि उसे जहर दिया गया था। तब पुलिस ने उसके दोस्त रियाजुद्दीन, आकाश, गुलशाद से फिर से पूछताछ की। इन्होंने बताया कि राजा को जलसा बार में बीयर में जहर दिया था। पुलिस ने बार के फुटेज चेक किए तो राजा और उसके तीनों दोस्त नजर आ गए। तीनों को
जेल भेजा गया।
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