आगरा के खंदौली के गांव नहर्रा में बड़े भाई शिवनाथ और छोटे भाई विश्वनाथ के बीच बुधवार सुबह से ही विवाद चल रहा था। सुबह पुलिस पहुंच भी गई, लेकिन विवाद को गंभीरता से नहीं लिया। दोनों भाइयों में विवाद शांत कराकर लौट गई। विश्वनाथ को हिदायत दी थी। शाम को एक बार फिर विश्वनाथ ने बवाल कर दिया। दरोगा प्रशांत यादव और सिपाही चंद्रसेन को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि वो गोली चला देगा। हत्याकांड की घटना के बाद लोग यही कह रहे थे कि पुलिस पहले ही सख्त कार्रवाई करती तो यह घटना नहीं होती।
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प्रशांत का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि विजय सिंह के पास पुश्तैनी 20 बीघा खेत पड़े थे। उन्होंने इन्हें दोनों बेटों शिवनाथ और विश्वनाथ के बीच बराबर का बांट दिया था। इसके अलावा विजय ने अपने पैसों से सात बीघा खेत और खरीदे थे। शिवनाथ की गांव में ही डेयरी है। उनका दूध का अच्छा कारोबार है। वह न्यू आगरा के इंद्रपुरी में पिता के साथ रहते हैं, जबकि विश्वनाथ गांव में मां राजेश्वरी के साथ ही रहता है। पिता के खेत पर कई साल से विश्वनाथ फसल कर रहा था। मगर, इस साल विजय सिंह ने खेत पर आलू करने के लिए शिवनाथ को दे दिया था। अब आलू की खुदाई होनी थी।
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आगरा में विलाप करता दरोगा का परिवार और प्रशांत का फाइल फोटो
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बुधवार सुबह विश्वनाथ और शिवनाथ के बीच आलू की खुदाई को लेकर विवाद हो गया। विश्वनाथ का कहना था कि आधा आलू मां के हिस्से के हैं। वह उन्हें मिलने चाहिए। मगर, शिवनाथ का कहना था कि पिता को पैसा दे दिया है। इसलिए पूरा आलू वही रखेगा। एक ट्रैक्टर ट्राली में आलू भरकर भेज दिए गए, जबकि दूसरी में भरकर आलू जा रहे थे।बताया गया है कि विश्वनाथ के साथ मां राजेश्वरी भी आ गईं। वह ट्रैक्टर के आगे खड़ी हो गईं। उन्होंने हंगामा कर दिया। इसकी सूचना शिवनाथ ने पुलिस को दी। गांव में थाना पुलिस और पीआरवी आ गई।
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घटनास्थल पर पुलिस के आला अधिकारी
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पुलिस भी शिवनाथ के पक्ष में बोलने लगी। शिवनाथ का कहना था कि उसने पिता से अधबटाई पर खेत लिया है। इसकी रकम भी अदा की है। इस कारण आलू पर उसका पूरा हक है। पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए बोल दिया। हिदायत दी कि अगर, कोई बवाल करेगा तो कार्रवाई कर देंगे। तब तो विश्वनाथ चला गया। इस पर आलू कोल्ड स्टोरेज पर भेज दिए गए। कुछ आलू शिवनाथ के घर भेजे गए।
आरोप है कि शाम को शिवनाथ अपनी डेयरी पर जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी विश्वनाथ आ गया। उसने हंगामा कर दिया। इसकी सूचना शिवनाथ ने 112 नंबर पर दी। इस पर दरोगा प्रशांत यादव और सिपाही चंद्रसेन आए थे। वह यह नहीं भांप सके कि विश्वनाथ किस इरादे से आया है। ग्रामीणों का कहना था कि सभी दोनों भाइयों का विवाद शांत करवाना चाहते थे। पुलिस भी यही सोचकर समझाती रही। मगर, विश्वनाथ दरोगा की जान ले लेगा। यह किसी ने भी सोचा नहीं था। सुबह ही भाइयों पर कार्रवाई हो जाती तो यह नहीं होता। विश्वनाथ पर पूर्व में मारपीट के मामले में कार्रवाई हुई थी। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। हालांकि इसका रिकार्ड खंगाला जा रहा था।
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घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस के अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
छावनी बना गांव, घरों में कैद हुए ग्रामीण
दरोगा की हत्या की घटना के गांव नहर्रा पुलिस छावनी बन गया। खेत से लेकर गांव के घरों तक के आसपास पुलिस तैनात कर दी गई। उधर, ग्रामीण भी घरों में कैद हो गए। पुलिस आरोपी की तलाश में दबिश दे रही थी। ग्रामीण कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे।
शासन ने दरोगा को दिया शहीद का दर्जा
एडीजी जोन राजीव कृष्ण देर रात तक मौके पर डटे थे। उन्होंने बताया कि शासन ने दरोगा को शहीद का दर्जा दिया है। उनके परिवार की शासन स्तर से हर संभव मदद की जाएगी। पुलिस को आरोपी की गिफ्तारी के लिए दिशानिर्देश दिए। छह से अधिक टीम का गठन किया। देर रात खेतों में भी हत्यारोपी विश्वनाथ की तलाश की गई। उसके रिश्तेदार और दोस्तों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही थी। पुलिस ने उसकी पहचान के लिए दबिश दीं।