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चंबल ने मचाया हाहाकार: बाढ़ प्रभावित गांवों में इलाज न मिलने से युवक-युवती की मौत

Fri, 20 Sep 2019 10:12 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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बाढ़ के चलते नहीं मिला इलाज बीमार युवक की मौत - फोटो : अमर उजाला
स्टीमर देरी से पहुंचने की वजह से बाह के बाढ़ प्रभावित गुढ़ा गांव में शेर बहादुर (27) की इलाज के अभाव में जान चली गई। गांव से बाहर निकलने का रास्ता बंद हो जाने से पुरा शिवलाल गांव में बुखार में तप रही मंजू (19) में भी दम तोड़ दिया। दोनों गांवों में घर-घर बुखार पीड़ितों की चारपाइयां बिछी हुई हैं।
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बाढ़ के चलते घरों की छत पर बैठे लोग - फोटो : अमर उजाला
चंबल किनारे के गांवों में डूबे घरों की छत पर डेरा जमाये बैठे परिवारों की दिन रात सांसें अटकी हुई हैं। फिलहाल बुधवार को नदी का जल स्तर 1.50  टर घटकर 135 मीटर रहा।, जो खतरे के निशान से अभी भी तीन मीटर ज्यादा है। वहीं तहसील मुख्यालय से 17 गांवों का संपर्क अभी टूटा हुआ है। तमाम परिवार बीहड़ के टीले पर रहने को मजबूर हैं।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रेस्क्यू टीम बिजली के तारों में उलझने से बाल बाल बची - फोटो : अमर उजाला
बुधवार को कोटा बैराज से 6 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इससे पहले 6.94 लाख क्यूसेक और 8 लाख क्यूसेक पानी छोडे़ जाने से उफनाई चंबल 136.50 मीटर के स्तर पर पहुंच गई थी। बुधवार को 1.50 मीटर घटकर 135 मीटर पर यह बह रही है। फिलहाल चंबल की बाढ़ ने बाह तहसील के 35 गांवों में भारी तबाही मचाई है। खेतों में फसलें नष्ट हो गई है। 20 गांवों के 700 घर जलमग्न हैं। कुुछ परिवारों ने बीहड़ के टीले पर शरण ले रखी है।

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स्टीमर से जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
अधिकांश परिवार सामान समेत छतों पर डेरा डाले हैं इनकी नजर रात-दिन चंबल के पानी पर ही है। इधर, 17 गांवों मऊ की मढै़या, हथकांत, गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, धांधूपुरा, भगवानपुरा, झरनापुरा, पुरा डाल, पुरा शिवलाल, उमरैठापुरा, क्योरीपुरा, बरेंडा, कछियारा, डगोरा, रेहा का बुधवार को भी तहसील मुख्यालय से संपर्क टूटा रहा। एसडीआरएफ की टीम बचाव और राहत कार्य में जुटी रही। भगवानपुरा, झरनापुरा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा के लिए स्टीमर सेवा जारी  रही।
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पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया - फोटो : अमर उजाला
बाह के नंदगवां और भिंड के अटेर के बीच महज चंबल नदी की धार का फासला है। चंबल की बाढ़ में दोनों गांवों के बीच बन रहे पुल के पिलर जलमग्न हो गए हैं। भदावर नरेश बदन सिंह द्वारा बनवाए गए किले के चारों ओर चंबल के उफान का पानी भर गया है। दोनों ही ओर चंबल के पानी ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार को मध्य प्रदेश के पूर्व  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हवाई सर्वे कर अटेर में तबाही का मंजर देखा। उनके हवाई निरीक्षण के दौरान नंदगवां में प्रभावित परिवार आसमान में टकटकी लगाए रहे। बाद में स्थिति साफ हुई तो मन मसोस कर रह गए। वहीं पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया।
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