वर्ष 1991, शहीद स्मृति क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला। आगरा का एकलव्य स्टेडियम और उसमें पैर रखने की भी जगह नहीं बची थी। लगा जैसे आगरा उमड़ आया हो। ऐसा होता भी क्यों न, मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर जो मैच में खेल रहे थे। सचिन रमेश तेंदुलकर ने सनराइज मफतलाल की ओर से अर्धशतक लगाया था।
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सचिन तेंदुलकर
- फोटो : अमर उजाला
27 साल बाद भी आगरा क्रिकेटप्रेमियों के दिल में यादें ताजा हैं। मास्टर ब्लास्टर की ये यादें उनके एक बार फिर रूबरू होने की इच्छा और बलवती कर देती हैं। मास्टर ब्लास्टर के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर सभी एक स्वर में बोले कि काश! सचिन एक बार फिर आगरा आएं। सचिन ने एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में दो पारियां खेली थीं। एक पारी में वह सिर्फ 11 रन ही बना सके थे। फाइनल मैच में 54 रनों की शानदार पारी खेलकर क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया था।
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सचिन तेंदुलकर
शहीद स्मृति क्रिकेट टूर्नामेंट तत्कालीन सचिव केके कपूर ने कहा कि वो समय भी गजब का था। सचिन की एक झलक पाने के लिए क्रिकेट प्रेमी कुछ भी करने पर आमादा थे। पुलिस को लोगों को संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। दर्शक दीर्घा से किसी
दर्शक ने एक पत्थर भी फेंका था। उसकी मंशा थी कि पत्थर फेंकने से सचिन के सामने आने वाले लोग हट जाएंगे, जिससे वह सचिन
को आराम से देख सकेगा।
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सचिन तेंदुलकर
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया में पच्चीकारी के लिए मशहूर आगरा के हाजी इकबाल लगभग सात पहले सचिन तेंदुलकर को अपने हाथ सेबनाई हुई भगवान गणेश जी की प्रतिमा भेंट करने के लिए नागपुर पहुंचे थे। नागपुर में मैच खेलने के दौरान अचानक ही सचिन को मुंबई के लिए रवाना होना पड़ा। हाजी इकबाल की सचिन से फोन पर बातचीत हुई।
सचिन ने उन्हें अपने निवास पर मुंबई बुला लिया। जब उन्होंने सचिन को गणेश जी की प्रतिमा भेंट की, तो वह काफी भावुक हो गए।वादा किया कि इस प्रतिमा को वह अपने नए घर में रखेंगे। हाजी इकबाल का कहना है कि सचिन ने उनका काफी सत्कार किया। उनको विश्वास ही नहीं हुआ कि क्रिकेट की दुनिया का इतना बड़ा खिलाड़ी, इतने सरल स्वभाव का भी हो सकता है।