बुलंदशहर के पालड़ा रेगुलेटर से आगरा तक बिछाई जा रही गंगाजल परियोजना की पाइप लाइन के लिए बाबरपुर और बांईपुर के जंगल में हजारों पेड़ काट दिए गए हैं। बेहद सेंसटिव ताज ट्रिपेजियम जोन में कैलाश मंदिर से बांईपुर और बाबरपुर के जंगल से होकर गुजारी गई पाइप लाइन के लिए केवल 109 पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी, लेकिन घने जंगल में पाइप के लिए 100 फुट चौड़ाई में जंगल की कटाई की गई है।
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गंगाजल
- फोटो : अमर उजाला
कैलाश घाट से खंदारी तक 100 फुट चौड़ी पट्टी में पूरा जंगल साफ हो चुका है। रातों रात काटे गए पेड़ों को ट्रकों और ट्रैक्टरों से मौके से हटवा दिया गया। हालांकि सेटेलाइट इमेज में काटे गए पेड़ों के सबूत मौजूद हैं। पालड़ा फाल से आगरा के सिकंदरा और जीवनी मंडी वाटरवर्क्स तक पाइप लाइन के जरिए गंगाजल लाया जा रहा है।
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आगरा में कैलाश घाट से यह पाइप लाइन जंगल से होकर गुजरती है। बाईंपुर और बाबरपुर के बेहद घने जंगल के बीच से गंगाजल प्रोजेक्ट की पाइप लाइन डाली जा रही है। कैलाश घाट से लेकर नगला बूढ़ी तक 100 से 120 फुट चौड़ाई में जंगल के पेड़ काट दिए गए। इनमें ज्यादातर बबूल के हैं। जिस जगह से पाइप लाइन गुजर रही है, वहां किसी एक्सप्रेस-वे की तरह चौड़ी सड़क नजर आने लगी है।
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गंगाजल
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यह वही बाबरपुर का जंगल है, जहां नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 8 हजार पेड़ काटने के मामले में एमसी मेहता से रिपोर्ट मांगी थी। तत्कालीन डीएफओ एनके जानू के खिलाफ जांच और यह मामला अभी भी जारी है। उसी जंगल में पर्यावरण मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट से 109 पेड़ों के काटने की अनुमति इस प्रोजेक्ट के लिए ली गई थी, लेकिन घने जंगल में अब तक हजारों पेड़ों को काटा जा चुका है। कैलाश, बांईपुर और बाबरपुर गांव के लोगों के मुताबिक रात में ट्रकों और ट्रैक्टरों में भरकर लकड़ियां भेजी जाती हैं।
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बता दें कि जल निगम ने वन विभाग को आगरा वाटर सप्लाई गंगाजल प्रोजेक्ट में जंगल की जमीन उपयोग करने के बदले 1.96 हेक्टेयर जमीन का टुकड़ा बाबरपुर में उपलब्ध कराया है। 2008 के इस प्रोजेक्ट में वन विभाग को जल निगम तभी से लीज की धनराशि दे रहा है, वहीं जमीन भी दे चुका है। बाबरपुर में दिए गए 1.96 हेक्टेयर जमीन पर पौधे तक नहीं लगाए गए, जबकि पौधारोपण के कई अभियान इन 9 सालों में चलाए गए। लीज की रकम से ही यहां पौधे लगाए जा सकते थे।
गंगाजल प्रोजेक्ट में बीहड़ में जिस जगह पाइप लाइन डाली गई है, वहां जल निगम ने कंक्रीट का बेस ही तैयार नहीं किया। शहर की ओर कुछ जगह कंक्रीट डाली गई है, लेकिन बांईपुर और बाबरपुर के जंगल में सरिया और कंक्रीट के बेस बिना मिट्टी में ही पाइप रख दिए गए। 150 क्यूसेक पानी की क्षमता वाली पाइप लाइन के मिट्टी में धंसने की आशंका बढ़ गई है।