जो पटरी जंग खाकर गल चुकी है, उसी से गतिमान सहित 35 ट्रेनें गुजर रही हैं। यह स्थिति कैंट स्टेशन परिसर के ट्रैक की है। अगर कोई हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। अधिकारियों का जवाब है, ब्लॉक न मिल पाने के कारण मरम्मत नहीं हो पाती है।
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आगरा कैंट स्टेशन परिसर के ट्रैक की जंग खा चुकी पटरियां
- फोटो : अमर उजाला
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार के बगल के ट्रैक की चाबियां जंग खा चुकी हैं। प्लेटफार्म नंबर पांच का ट्रैक क्षतिग्रस्त है, सीमेंट के स्लीपर टूटे पड़े हैं। स्लीपर के बीच में लोहे के एंगिल निकल आए हैं। ट्रैक की यह दशा ट्रैक मरम्मत करने वाले विभाग की लापरवाही को दर्शाती है।
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आगरा कैंट स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
रेल पथ निरीक्षक को रेलवे ट्रैक की नियमित जांच करनी होती है। ट्रैक मेंटेनर गश्त करते हैं। इसके बावजूद मरम्मत नहीं कराई जा रही है। इंजीनियरिंग विभाग ट्रैक की नियमित चेकिंग की बात कर रहा है। लेकिन, रेलवे सूत्रों का कहना है कि चेकिंग रिपोर्ट में इन बातों का जिक्र नहीं है।
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गतिमान एक्सप्रेस
- फोटो : अमर उजाला
आगरा कैंट स्टेशन पर रोजाना 80 से 100 गाड़ियां होकर गुजरती हैं। इनमें यात्री ट्रेनों के अलावा गुड्स ट्रेनें भी शामिल हैं। झांसी की ओर से आने वाली ट्रेनें भी यहां से होकर गुजरती हैं। इसी ट्रैक से कई दफा प्लेटफार्म बदलने पर गतिमान एक्सप्रेस भी होकर गुजरती है। गल चुके ट्रैक पर रोजाना लगभग 35 ट्रेनें होकर गुजरती हैं।
ब्लॉक नहीं मिलता, क्या करें ...
एसके श्रीवास्तव, वाणिज्य प्रबंधक
सवाल - स्टेशन परिसर में ही रेलवे ट्रैक की दशा खराब है। चाबियों पर जंग लगी हुई। स्लीपर कब से नहीं बदले गए?
जवाब - इन प्लेटफार्म पर गाड़ियां अक्सर खड़ी रहती हैं। पानी लगातार गिरता है इससे पटरियों पर जंग लग जाता है। इसे बदला जाएगा।
सवाल - अगर ट्रैक का नियमित निरीक्षण होता है तो संबंधित रेल पथ निरीक्षक ने अभी तक मरम्मत क्यों नहीं कराई ?
उत्तर: निरीक्षण किया जाता है। मरम्मत के लिए कई दफा ब्लॉक मिलने में देरी होती है।