अयोध्या में रामलला के दर्शन कर खाटूश्याम जा रहे श्रद्धालुओं की कार आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कंटेनर में घुस गई। हादसे में दंपती समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
आगरा- लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फतेहाबाद क्षेत्र में रविवार रात 1:40 बजे कार चालक को झपकी आने से तेज रफ्तार आगे चल रहे कंटेनर में जा घुसी। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और कंटेनर में फंस गई। सूचना पर पहुंची पुलिस और यूपीडा की टीम ने करीब आधे घंटे में घायलों को बाहर निकाला। तब तक दंपती सहित तीन की माैत हो गई और पांच लोग गंभीर रूप से घायल थे। सभी बिहार के बांका और राजस्थान के चुरू व सीकर जिले के रहने वाले थे। अयोध्या में रामलला के दर्शन के बाद खाटूश्याम जी के दर्शन को जा रहे थे।
थाना फतेहाबाद पुलिस के मुताबिक, कार चुरु के थाना सरदारशहर निवासी शोएब चला रहे थे। कार में जिला सीकर निवासी शंकरलाल, उनकी पत्नी प्रीति, उनके दोस्त जिला चुरू के सुजानगढ़ निवासी राजू, उनकी पत्नी प्रमिला, राजू के जीजा बिहार के बांका जिले के थाना अमरपुर निवासी सुनील कुमार, बहन पूजा और आठ साल का भांजा अयांश सवार थे। सभी रविवार को अयोध्या में रामलला के दर्शन के बाद शाम को सीकर में खाटूश्याम जी के दर्शन के लिए निकले थे। वहां से उन्हें चुरू जाना था।
रविवार रात करीब 1:40 बजे उनकी कार थाना फतेहाबाद क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किलोमीटर संख्या 36.950 पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि चालक को झपकी आने के कारण कार आगे चल रहे कंटेनर में जा घुसी। हादसे के बाद चालक करीब 50 मीटर तक कार को घसीटता हुआ ले गया। बाद में चालक ने पीली पट्टी पर आकर ब्रेक लगाए और कार के नहीं निकलने पर कंटेनर छोड़कर भाग गया।
चालक सीट के बराबर वाला हिस्सा कंटेनर में फंसा हुआ था। पीछे की सीट पर बैठे लोग भी फंस गए। राहगीरों की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक फतेहाबाद, यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी प्रथम राधा मोहन द्विवेदी टीम के साथ पहुंच गए और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। कार में फंसे लोगों को निकालने के लिए हाइड्रा मशीन बुलानी पड़ी।
करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक शंकरलाल, उनकी पत्नी प्रीति और सुनील की माैत हो चुकी थी। हादसे में प्रमिला, राजू, शोएब, पूजा कुमारी, अयांश गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें सीएचसी फतेहाबाद से प्राथमिक उपचार के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी भेजा गया। वहीं, पुलिस ने शवों को पोस्टमाॅर्टम के लिए भेज दिया।
100 किमी. प्रति घंटा से ज्यादा थी कार की रफ्तार
एसीपी फतेहाबाद इमरान अहमद ने बताया कि कंटेनर चालक की तलाश की जा रही है। वहीं प्रारंभिक जानकारी पर कार चालक शोएब ने बताया कि वह दो दिन से गाड़ी चला रहा था। बीच में दो से तीन घंटे ही गाड़ी रुकी थी। रात में उसे झपकी आ गई। उस समय कार की गति 100 किमी. प्रति घंटा से ज्यादा थी। अचानक हादसा हो गया। मामले में कंटेनर चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।
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इसी कंटेनर से हुआ हादसा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
झपकी और लंबी दूरी बन रही काल
लखनऊ एक्सप्रेसवे पर छह दिन में सड़क हादसों में 9 लोगों की मौत हो गई। सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने लोगों की जान जाने पर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ई-मेल से पत्र भेजा है। इसमें सुरक्षा उपायों का पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की है।
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कार का हुआ ये हाल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
26 मई, 2026 को उन्नाव में घटना हुई थी। इसमें 6 लोगों की जान गई थी, जबकि 21 घायल हो गए थे। हादसा सुबह 5:15 बजे किलोमीटर संख्या 262 पर हुआ। दिल्ली से बिहार जा रही 50 यात्रियों से भरी एसी बस पलट गई थी। मृतकों में एक सब इंस्पेक्टर भी शामिल थे। दूसरा हादसा सोमवार को फतेहाबाद क्षेत्र में हुआ। इसमें 3 लोगों के मृत्यु हो गई, जबकि 5 घायल हुए।
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घायल महिला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अधिवक्ता ने बताया कि लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हो रहीं दुर्घटनाओं के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में हेमंत जैन ने 9 दिसंबर, 2024 को याचिका प्रस्तुत की है। न्यायालय ने आवेदन को सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति को संदर्भित किया है। समिति की कुछ बैठकें हुई हैं। समिति ने अब तक इस विषय पर अपनी रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत नहीं की है।
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अस्पताल में भर्ती घायल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अधिवक्ता ने पत्र में मांग की है कि यूपीडा को तत्काल निर्देश दिया जाए कि 10 नवंबर, 2025 की बैठक में सहमत सभी सुरक्षा उपायों की स्थिति की पारदर्शी स्टेटस रिपोर्ट 30 दिन के अंदर सार्वजनिक करे। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच गति सीमा तत्काल प्रभाव से 80 किमी/घंटा की जाए। ड्राइवर विश्राम क्षेत्र के लिए कार्ययोजना बनाई जाए। आईआईटी दिल्ली, सीआरआरआई से तत्काल नया रोड सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। लखनऊ एक्सप्रेसवे को सेफ्टी कॉरिडोर बनाना होगा।
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अस्पताल में भर्ती महिला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ये हैं आंकड़े
वर्ष 2021 से 2025 के बीच आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कुल 7,024 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें से 54.7 प्रतिशत दुर्घटनाओं का एकमात्र कारण चालक की झपकी या थकान रहा। रात 12 बजे से सुबह 8 बजे के बीच लगभग 70 प्रतिशत दुर्घटनाएं हुईं। वर्ष 2019 के बाद से कोई स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट नहीं हुआ जबकि वाहन संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है। यदि ये तथ्य यूपीडा के स्वयं के संज्ञान में थे तो सुधारात्मक उपाय क्यों लागू नहीं हुए? यह आंकड़े 10 नवंबर, 2025 को लखनऊ स्थित यूपीडा मुख्यालय में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रस्तुत किए गए थे।
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क्षतिग्रस्त कार। संवाद
इन पर बनी थी सहमति
- रात्रि गति सीमा को 120 किमी/घंटा से घटाकर 75-80 किमी/घंटा करना।
- ड्रोन आधारित दुर्घटना रिकॉर्डिंग एवं रियल-टाइम निगरानी।
- आईआईटी दिल्ली या सीआरआरआई से नया स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट।
- क्रैश बैरियर एवं ड्राइवर वेलनेस जोन की स्थापना।
- वे-साइड सुविधाएं एवं प्रत्येक 40-50 किमी पर चालक विश्राम क्षेत्र।
- रात में चालकों के लिए मुफ्त रुकने की सुविधा, 5 रुपये में चाय और 20 में भोजन।
- केवल स्पीड नहीं, मोबाइल उपयोग, सीट बेल्ट, रियर-रिफ्लेक्टर, घिसे टायर, ओवरलोडिंग एवं फिटनेस प्रमाणपत्र की भी जांच हो।
इनका रखें ध्यान
- नींद या झपकी आने पर चालक को रुक जाना चाहिए। पीली पट्टी पर सड़क किनारे वाहन को रोककर हाथ और मुंह धोने चाहिए। पानी और चाय पीकर सुस्ती दूर करनी चाहिए, तब वाहन चलाना चाहिए।
- चालक के साथ बैठे लोग आपस में बातचीत करते रहें जिससे चालक को नींद या झपकी नहीं आए। म्यूजिक भी बजता रहना चाहिए।
- वाहन चालक लगातार 8 घंटा से ज्यादा वाहन न चलाएं, चाय और पानी पीते रहें। 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कार को न चलाएं।
- लगातार लंबे समय तक वाहन न चलाएं। लंबी दूरी के सफर में संभव हो तो दो चालक रखें। इससे बारी-बारी से वाहन चलाया जा सके।