मैनपुरी जनपद के गांव औरंध में रविवार के दिन एक ही चिता पर तीन पीढिय़ां एक साथ जलीं तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। दिनभर गांव में परिजनों की चीख गूंजती रही। वहीं हादसे में घायल मां-बेटे का बारां राजस्थान के अस्पताल में इलाज चल रहा है।
राजस्थान के बारां में हुए सड़क हादसे के बाद रविवार को रिटायर्ड सूबेदार नरेश सिंह चौहान, उनके पुत्र संदीप चौहान और पौत्री अनामिका का शव पैतृक गांव औरंध पहुंचा। शव पहुंचते ही गांव परिजनों और रिश्तेदारों की चीख पुकार से गूंज उठा। वहां मौजूद हर किसी की आंख नम थी। स्थिति यह रही कि गांव में चूल्हे तक नहीं जले।
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अनामिका (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
शव पहुंचते ही रिश्तेदारों के साथ ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में नरेश सिंह चौहान के घर पर पहुंच गए। दोपहर बाद नम आंखों के बीच शवों का अंतिम संस्कार किया गया। गांव के बाहर एक चिता बनाकर तीनों शव की अंतेष्टि की गई। मुखाग्नि मृतक नरेश के भाई सुरेश के पुत्र अरविंद चौहान ने दी।
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संदीप चौहान (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बिछवां थाना क्षेत्र के गांव औरंध निवासी सेना के रिटायर्ड सूबेदार नरेश सिंह चौहान (68) पत्नी की मौत के बाद अपने बैंककर्मी पुत्र संदीप चौहान (44) के साथ अहमदाबाद में रह रहे थे। फसल काटे जाने का समय नजदीक आ गया था। इसके चलते शनिवार को संदीप पिता नरेश चौहान, 43 वर्षीय पत्नी दुर्गेश नंदनी, 17 वर्षीय पुत्र आर्यन और 14 वर्षीय पुत्री अनामिका के साथ कार से गांव आ रहे थे। शनिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे राजस्थान के बारां क्षेत्र में एनएच 27 पर उनकी कार सड़क पर खड़े ट्रॉला से टकराकर सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। हादसे में नरेश चौहान, संदीप चौहान और अनामिका की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं दुर्गेश नंदनी और आर्यन का उपचार बारां के एक अस्पताल में चल रहा है।
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मौतों के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में गांव औंरध निवासी तीन लोगों की मौत हो गई। मृतक संदीप की पत्नी दुर्गेश नंदनी और पुत्र आर्यन का उपचार चल रहा है। दुर्गेश जानती है कि ससुर, पति और बेटी अब इस दुनियां में नहीं रहे हैं, लेकिन आर्यन आईसीयू में भर्ती है। उसे अभी नहीं पता कि उसे सबसे ज्यादा प्यार करने वाला दादा, पिता और छोटी बहन अब दुनियां में नहीं है।
घ्ार में विलाप करते परिजन और ग्रामीण्ा
- फोटो : अमर उजाला
पति और पुत्री को खो चुकी दुर्गेश नंदनी नहीं चाहती कि बेटे को अभी कुछ पता लगे। इसलिए वह भी अपने आंसुओं को आंचल में छिपाए हुए हैं। हादसे में जान गवाने वाली 14 वर्षीय अनामिका माता-पिता की चहेती थी। वहीं दादा की जान उसमें बसती थी। दादा आर्यन और अनामिका को बेहद प्यार करते थे।