अगर 50 हजार रुपये से ज्यादा का माल एक राज्य से दूसरे राज्य या राज्य के अंदर भी भेजा जा रहा है तो ई-वे बिल चाहिए होगा। एक अप्रैल से ई-वे बिल की व्यवस्था लागू हो जाएगी। पूर्व में एक फरवरी से केंद्र सरकार ने इसे लागू किया था, लेकिन सर्वर ठप हो जाने के कारण इसे टालना पड़ा। ट्रांसपोर्टरों के हड़ताल के ऐलान के कारण महज दो दिन में ही ई-वे बिल को टाला गया था। अब व्यापारियों में फिर से ई-वे बिल को लेकर कई सवाल हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
अगर किसी भी राज्य से 50 हजार रुपये से ज्यादा की कीमत वाला सामान लाना हो गया, भेजना हो तो ई-वे बिल जरूरी है। माल भेजने वाले को यह बिल डाउनलोड करना होगा। जीएसटी की वेबसाइट पर यह फार्म जीएसटी नंबर से डाउनलोड होंगे। इस बिल की मियाद होगी। 100 किमी की दूरी के लिए ई-वे बिल एक दिन के लिए वैध होगा।
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वहीं 100 से 300 किमी दूरी के लिए 3 दिन, 500 किमी तक 5 दिन और एक हजार किमी के लिए दस दिन तथा एक हजार किमी से ज्यादा के लिए 15 दिन तक वैध रहेगा। सड़क मार्ग के साथ रेल यातायात और हवाई मार्ग से सामान पहुंचाने के लिए इसकी वैधता तय की गई है। वाणिज्य कर एडीशनल कमिश्नर डा. बुद्धेश मणि के मुताबिक इस बार ई-वे बिल के लिए पूरी तैयारियां हैं। किसी भी व्यापारी को परेशानी नहीं होगी।
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हेल्प डेस्क है और अगर किसी को दिक्कतें हैं तो वह सीधे संपर्क कर सकता है। 50 लाख रुपये वार्षिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों के टैक्स के निर्धारण के लिए वाणिज्य कर विभाग ने सूची तैयार की है, जिसमें वैट के दौरान 2016 में डीलरों को दो भागों में बांटा गया। 50 लाख से कम और इससे ज्यादा टर्न ओवर वाले व्यापारियों का चिन्हांकन किया गया।
इसमें आगरा में 13,613 व्यापारी 50 लाख से ज्यादा टर्न ओवर वाले पाए गए, जबकि 9291 व्यापारियों का टर्न ओवर 50 लाख रुपये से नीचे रहा। करीब 4322 व्यापारियों को चिन्हित ही नहीं किया गया। उनके टैक्स के निर्धारण में इससे दिक्कतें आ रही हैं। पुराने बकाए को देखते हुए वाणिज्य कर कमिश्नर कामिनी चौहान रतन ने 30 अप्रैल तक का वक्त कर निर्धारण अधिकारियों को दिया है।