कोरोना वायरस से बचाव के मद्देनजर बंद किए गए ताजमहल के मुख्य गुंबद की सफाई की जा रही है। दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल के तामीर होने के 372 साल बाद पहली बार संगमरमरी गुंबद की सफाई की जाएगी।
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ताजमहल में पसरा सन्नाटा
- फोटो : Amar Ujala
मुल्तानी मिट्टी के लेप वाले मडपैक से इसे साफ करने का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की रसायन शाखा ने शुरू कर दिया है। इसमें छह महीने का समय लग सकता है। कोरोना वायरस के कारण ताजमहल 31 मार्च तक के लिए बंद है। ताज के मुख्य गुंबद पर पाड़ बांधने का काम शुरू कर दिया गया है।
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ताजमहल में सन्नाटा
- फोटो : Amar Ujala
पर्यटकों के न होने के कारण गुंबद पर लोहे के पाइप ले जाने में परेशानी नहीं हो रही है। कोरोना वायरस के कारण ताज पर सितंबर तक पर्यटकों की संख्या कम रहने का अनुमान है। 30 लाख की लागत से होने वाले मडपैक का काम एएसआई भी सितंबर के अंत तक पूरा कर लेगा।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
चार साल तक चला ताज का मडपैक संसदीय कमेटी की सिफारिश पर ताज के पीलेपन को दूर करने के लिए 2015 में मीनारों समेत ताजमहल पर मडपैक किया गया था।
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ताजमहल का मुख्य गुंबद
- फोटो : अमर उजाला
साल 2019 में गुंबद पर मडपैक से पहले छत की लोड बीयरिंग कैपेसिटी के बाद मडपैक पर सहमति बनी। एएसआइ की इंजीनियरिंग शाखा ने अध्ययन के बाद मडपैक के लिए पाइप लगाने की मंजूरी दे दी। रॉयल गेट की तरफ से गुंबद का काम शुरू होगा।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ था संरक्षण
ताज के गुंबद पर द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1941-44 के बीच संरक्षण का काम किया गया था। तक लकड़ी और बांस की पाड़ लगाई गई थी। तब गुंबद के चटके पत्थरों को 92 हजार रुपये में बदल गया था।