372 साल में यह पहला मौका है जब ताजमहल आम सैलानियों के लिए एक महीने तक बंद रहेगा। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण ताजमहल समेत देशभर के स्मारकों को 17 मार्च की सुबह से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था। तब से अब तक 24 दिन हो चुके हैं और लॉकडाउन की अवधि खत्म होने पर एक महीने का समय हो जाएगा। ऐसे में एक महीने तक ताजमहल बंद रहने का यह पहला मौका होगा। इससे पहले ताजमहल को दो बार पर्यटकों के लिए बंद किया जा चुका है।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच शुरू हुई जंग में चार दिसंबर से 18 दिसंबर के बीच ताजमहल में पर्यटकों का प्रवेश बंद कर दिया गया था। तब ताजमहल के ऊपर हरे रंग के जाल को डाला गया था ताकि हवाई हमले के दौरान यह चमकता हुआ नजर न आए। 15 दिनों तक ताजमहल तब बंद रहा था।
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ताजमहल पूर्वी गेट पर दशहरा घाट से सटी हवेली (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उसके बाद 1978 में सितंबर के महीने में आई बाढ़ के दौरान लोगों का हुजूम उमड़ने के कारण ताजमहल में पर्यटकों का प्रवेश सात दिनों के लिए बंद किया गया। तब ताजमहल के ऊंचाई पर होने और यमुना का पानी टकराने के कारण शहर भर से लोग मुख्य गुंबद पर जलस्तर देखने आते थे। चमेली फर्श के थोड़ा नीचे तक पानी आ गया था और ताज के भूमिगत कक्षों में पानी भरने लगा था।
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ताजमहल
- फोटो : Amar Ujala
उसके बाद कोराना वायरस के संक्रमण के कारण इस वर्ष 17 से 31 मार्च के बीच 15 दिन की अवधि के लिए ताजमहल को आम पर्यटकों के लिए बंद किया गया था। ताजमहल में सैनिटाइजेशन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने काम शुरू भी कराए, लेकिन लॉकडाउन के एलान के बाद मडपैक, संरक्षण, सफाई समेत सभी काम रोक दिए गए।
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ताजमहल
- फोटो : Amar Ujala
एएसआई रसायन शाखा ने मुख्य गुंबद पर मडपैक के लिए लोहे के पाइप लगाने का काम शुरू कर दिया था, वहीं संरक्षण शाखा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे के बाद रुके संरक्षण कार्य करने की शुरुआत की थी, लेकिन लॉकडाउन में सभी कर्मचारियों के रुकने और कारीगरों की उपलब्धता न होने के कारण सभी काम स्थगित कर दिए गए।
प्रधानमंत्री की अपील के चलते सोशल डिस्टेंसिंग और संपूर्ण लॉकडाउन का पालन कराया जा रहा है। संक्रमण के डर के कारण कोई काम नहीं कराया जा रहा। दैनिक सफाई के काम कर्मचारी कर रहे हैं। उन्हें भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखने को कहा गया है। -वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद, एएसआई